छत्तीसगढ़

राजनांदगांव : नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी अपनाकर किसान घटाएं लागत, बढ़ाएं धान का उत्पादन

। कृषि विभाग द्वारा किसानों को धान सहित विभिन्न फसलों में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। नैनो उर्वरक आधुनिक कृषि तकनीक पर आधारित हैं, जिनके उपयोग से पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ती है, उत्पादन लागत कम होती है तथा पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलती है। धान की फसल में नैनो डीएपी का पहला छिड़काव रोपाई के 25 से 30 दिन बाद तथा दूसरा छिड़काव आवश्यकता अनुसार 10 से 15 दिन बाद किया जा सकता है। नैनो यूरिया का पहला छिड़काव रोपाई के 30 से 35 दिन बाद तथा दूसरा छिड़काव बालियां निकलने के पूर्व 15 से 20 दिन के अंतराल पर किया जाना लाभकारी पाया गया है। प्रति एकड़ 250 मिलीलीटर नैनो डीएपी अथवा नैनो यूरिया को लगभग 125 लीटर पानी में घोलकर पत्तियों पर समान रूप से छिड़काव करने की अनुशंसा की जाती है। नैनो यूरिया की 500 मिलीलीटर की एक बोतल लगभग 45 किलोग्राम पारंपरिक यूरिया के बराबर प्रभाव प्रदान करती है। इसी प्रकार नैनो डीएपी फसलों में नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस की उपलब्धता बढ़ाकर जड़ों के विकास, पौधों की वृद्धि एवं कल्ले बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पारंपरिक यूरिया की 45 किलोग्राम की एक बोरी का मूल्य लगभग 266 रूपए तथा डीएपी की 50 किलोग्राम की एक बोरी का मूल्य लगभग 1350 रूपए है। इसके विपरीत नैनो यूरिया की 500 मिलीलीटर की एक बोतल लगभग 225 रूपए तथा नैनो डीएपी की 500 मिलीलीटर की बोतल लगभग 600 रूपए में उपलब्ध है। पारंपरिक उर्वरकों का केवल 30 से 50 प्रतिशत भाग ही फसल द्वारा उपयोग किया जा पाता है, जबकि शेष भाग बहाव, वाष्पीकरण अथवा भूमि में स्थिरीकरण के कारण नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत नैनो उर्वरकों की उपयोग दक्षता 80 प्रतिशत से अधिक होती है, जिससे पौधों को पोषक तत्व सीधे एवं प्रभावी रूप से प्राप्त होते हैं। इससे उर्वरक की बचत होने के साथ-साथ उत्पादन एवं गुणवत्ता में भी सुधार होता है। नैनो उर्वरकों के उपयोग से परिवहन एवं भंडारण की लागत कम होती है, मिट्टी एवं जल प्रदूषण में कमी आती है तथा भूमि की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार संतुलित उर्वरक प्रबंधन के अंतर्गत नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग किसानों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हो रहा है। कृषि विभाग द्वारा विकासखंड एवं ग्राम स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम, प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। किसानों से अपने नजदीकी कृषि कार्यालय, कृषि विस्तार अधिकारी अथवा किसान कल्याण केंद्र से संपर्क कर नैनो उर्वरकों के उपयोग की जानकारी कर आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की अपील की गई है।

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