पाकिस्तानी हैंडलर का खतरनाक प्लान बेनकाब, युवकों को जिम जाने और पासपोर्ट बनवाने के दिए थे निर्देश

भोपाल
 मध्य प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) की जांच में देश विरोधी गतिविधियों के आरोपितों से जुड़े नए और चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इंटरनेट मीडिया और वाट्सएप के जरिए संपर्क में रहने वाला पाकिस्तानी हैंडलर आरोपित युवकों को नियमित रूप से जिम जाने, शारीरिक रूप से फिट रहने और पासपोर्ट बनवाने का निर्देश दे रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि उन्हें भविष्य में प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने की तैयारी की जा रही थी।

एटीएस सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर युवकों को कथित तौर पर “लड़ाके” बनने के लिए शारीरिक रूप से तैयार रहने की सलाह देता था। इसी क्रम में पासपोर्ट बनवाने पर भी विशेष जोर दिया गया था। अब तक गिरफ्तार आरोपितों में केवल भोपाल निवासी फराज के पास पासपोर्ट मिलने की पुष्टि हुई है।

चार राज्यों से चार आरोपित गिरफ्तार
इस मामले में एटीएस अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें भोपाल से फराज, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम अब्दुल्ला, राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव और बिहार के मधुबनी से इजहार उल हक को पकड़ा गया है। सबसे पहले गिरफ्तार किए गए फराज को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है।

आतंकी संगठनों से संबंधों की जांच जारी
एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपितों के संबंध किसी आतंकी संगठन से थे या नहीं। हालांकि प्रारंभिक पूछताछ में सभी आरोपित किसी बड़े संगठन से जुड़े होने से इन्कार करते रहे हैं। इसके बावजूद जांच एजेंसियां इस दावे की गहन पड़ताल कर रही हैं।

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डिजिटल सबूतों की होगी फोरेंसिक जांच
जांच का फोकस अब आरोपितों से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों पर है। एटीएस इन डिवाइसों से डेटा रिकवर कर उनके ऑनलाइन नेटवर्क, सोशल मीडिया संपर्कों और चैटिंग रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही उन लोगों की पहचान भी की जा रही है, जो इन आरोपितों के संपर्क में थे।

सूत्रों का मानना है कि डिजिटल जांच के बाद इस मामले में और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है, जिससे गिरफ्तार आरोपितों की संख्या बढ़ने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।

फंडिंग के सबूत अभी नहीं मिले
जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक किसी संस्था, संगठन या व्यक्ति द्वारा देश विरोधी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता दिए जाने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि आरोपितों के बैंक खातों और लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि किसी संभावित फंडिंग नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

 

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