ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए मध्यप्रदेश बन रहा प्रमुख निवेश का केन्द्र

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए मध्यप्रदेश बन रहा प्रमुख निवेश का केन्द्र

एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 में जीसीसी क्षेत्र के विशेषज्ञ करेंगे मंथन

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के लिए देश के उभरते हुए निवेश गंतव्यों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। कुशल मानव संसाधन, प्रतिस्पर्धी संचालन लागत, उत्कृष्ट अधोसंरचना और उद्योग-अनुकूल नीतियों के कारण प्रदेश वैश्विक कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। इसी उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के माध्यम से 13 जुलाई को भोपाल में आयोजित होने वाले एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 में जीसीसी राउंडटेबल का आयोजन किया जाएगा।

“ भारत का अगला जीसीसी विकास गंतव्य : मध्यप्रदेश में प्रतिभा, लागत एवं नवाचार का लाभ” विषय पर आयोजित राउंडटेबल में देश-विदेश की अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियाँ, जीसीसी संचालक, उद्योग विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और शिक्षाविद शामिल होगें। इसमें भारत में जीसीसी क्षेत्र के विस्तार, निवेश की संभावनाओं, प्रतिभा विकास और नवाचार आधारित विकास पर विचार-विमर्श होगा।

मध्यप्रदेश की जीसीसी नीति-2025 वैश्विक कंपनियों को राज्य में जीसीसी स्थापित करने और विस्तार देने के लिए व्यापक प्रोत्साहन उपलब्ध कराती है। नीति के अंतर्गत परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान, रोजगार सृजन आधारित प्रोत्साहन, किराया सहायता, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) प्रोत्साहन, कौशल विकास सहयोग, गुणवत्ता प्रमाणीकरण सहायता, भूमि रियायत और स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क की प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

प्रदेश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान, बड़ी संख्या में उपलब्ध इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन स्नातक, बेहतर कनेक्टिविटी और अपेक्षाकृत कम संचालन लागत मध्यप्रदेश को जीसीसी निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाते हैं। राउंडटेबल में टीसीएस, कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस, टेलीपरफॉर्मेंस, आर1 आरसीएम ग्लोबल, थोलॉन्स और लाइटकास्ट इंडिया सहित अनेक अग्रणी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

जीसीसी राउंडटेबल से मध्यप्रदेश में वैश्विक क्षमता केंद्रों के निवेश को नई गति मिलेगी। इससेउद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इंजीनियरिंग, वित्त , अनुसंधान, एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होगें।

 

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