राजनांदगांव । पंडित शिव कुमार शास्त्री कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र सुरगी द्वारा स्थापित कृषि तकनीकी सूचना सलाह केन्द्र अंतर्गत ग्रामीण उद्यमिता जागरूकता विकास योजना (रेडी ) के चयनित ग्राम धामनसरा में कृषकों के लिए खरपतवारों की पहचान एवं उसके नियंत्रण विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में सहायक प्राध्यापक सस्य विज्ञान डॉ. संतोष कुमार साहू ने धान की फसलों में पाये जाने वाले प्रमुख खरपतवार संकरी पत्ति वाले सॉवा, बदौर, करगा, दुब घास एवं चौड़ी पत्ति वाले खरपतवारों में कऊवाकेनी, बावची, महकुव, सिलियारी, मुंगेसर तथा मोथा प्रजातियों में नागर मोथा (चुहका) का पहचान के संबंध में जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि खरपतवारों को समय पर नियंत्रित नहीं किये जाने से फसल उपज में 45 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। प्रशिक्षण के दौरान खरपतवारनाशी का भण्डारण घोल तैयार करना, मात्रा एवं उपयोग करने के सही समय की विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी। प्रशिक्षण में बताया गया कि खरपतवार के प्रभावी नियंत्रण हेतु चुहका (मोथा प्रजाति) के खरपतवार हेतु क्लोरीम्यूरान मेटसल्फुरान 20 प्रतिशत चूर्ण की 8 ग्राम दवा प्रति एकड़ एवं मिश्रित खरपतवार प्रजातियों हेतु बिसपाइरी बेक सोडियम 10 प्रतिशत एससी की 100 एमएल प्रति एकड़ तथा संावा की अधिकता होने पर फेनोक्साप्राप पी ईथाइल 9.3 प्रतिशत इसी का 300 एमएल प्रति एकड़ की दर से प्रत्येक खरपतवार नाशी को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर बुवाई व रोपाई के 20-25 दिन बाद छिड़काव करने की सलाह दी गई। प्रशिक्षण में ग्राम धामनसरा के कृषकों के साथ महाविद्यालय के चतुर्थ वर्ष के ग्रामीण उद्यमिता जागरूकता विकास योजना (रेडी स्टूडेंट) विद्यार्थी उपस्थित थे।
राजनांदगांव : ग्राम धामनसरा में खरपतवारों की पहचान एवं उसके नियंत्रण विषय पर प्रशिक्षण का हुआ आयोजन















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