राजनांदगांव : सोनोग्राफी कराने लंबी वेटिंग, 20 दिन बाद की मिल रही तारीख, गर्भवतियां चक्कर लगा रहीं…

राजनांदगांव : सोनोग्राफी कराने लंबी वेटिंग, 20 दिन बाद की मिल रही तारीख, गर्भवतियां चक्कर लगा रहीं…

राजनांदगांव , जिला अस्पताल में सोनोग्राफी कराने पहुंच रही गर्भवतियों की वेटिंग बढ़ती जा रही है। वेटिंग लंबी होने की वजह से उन्हें 20 दिन की बाद की तारीख दी जा रही। अस्पताल में पहुंची कुछ गर्भवतियों को अगले माह 2 सितंबर की तारीख दी गई। इससे खासकर तीन माह से ज्यादा गर्भावस्था वाली और हाई रिस्क वाली गर्भवतियों की परेशानी बढ़ जाती है। गर्भवतियों को लेकर परिजन जिला अस्पताल का चक्कर काटने मजबूर हो रहे। डॉक्टरों की सलाह के बाद सोनोग्राफी कराने में देर होने से परिजनों की चिंता बढ़ रही है।

सोनोग्राफी में लंबी वेटिंग होने का एक प्रमुख कारण इंटर्न डॉक्टरों द्वारा अधिकांश मामलों में सामान्य बीमारी और समस्या में मरीजों को सोनोग्राफी की सलाह देना भी है। पेट से संबधित रोग, बीमारी, तकलीफ के मामले में इंटर्न डॉक्टरों के द्वारा सीखने के उद्देश्य से मरीजों को सोनोग्राफी लिख दी जाती है।

निजी अस्पतालों में सोनोग्राफी कराना मजबूरी: जिला अस्पताल में लंबी वेटिंग होने के कारण कई परिजनों को हाई रिस्क वाली गर्भवतियों का निजी अस्पतालों में सोनोग्राफी कराने पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इसमें 1 हजार से 3 हजार रुपए तक खर्च आता है। डॉक्टरों की सलाह दिए जाने से परिजनों में गर्भवती और गर्भ में पल रहे शिशु पर कोई जोखिम, खतरा नहीं होने के डर में परिजन निजी अस्पतालों में सोनोग्राफी कराने मजबूर हो रहें है।

जिला अस्पताल में रोज औसत 50 मरीज और गर्भवतियां सोनोग्राफी कराने पहुंचती है। इसमें रोज 25 की सोनोग्राफी की जाती है जबकि 25 मामलों में तारीखें दी जाती है ऐसे में पेंडिंग बढ़ती जा रही है। जुलाई माह में कुल 1055 की सोनोग्राफी की गई जिसमें 400 हाई रिस्क वाली गर्भवतियों की सोनोग्राफी की वहीं सोनोग्राफी करने से अन्य 25 हाई रिस्क वाले मामले सामने आए है। उन हाई रिस्क वाली गर्भवतियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

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रेडियोलॉजिस्ट के कोर्ट में पेशी, गवाही के नाम से गायब रहने और निजी अस्पतालों में सेवा देने की लगातार शिकायतें सामने आती रहती है। जिला अस्पताल में सोनोग्राफी करने 1 रेडियोलॉजिस्ट है। कई आपराधिक मामले, महिलाओं से हुए अपराध के मामले में पेशी, गवाही के लिए कोर्ट जाना पड़ता है। इसके लिए अस्पताल में एक वीसी रूम बनाया गया है जहां से ऑनलाइन पेशी गवाही हो सकती है। लेकिन दूसरी तरफ पुलिस और वकील उपस्थिति में देरी करते है। देरी के कारण प्रक्रिया में समय खराब होता है। गर्भवतियों की कतारें लगी रहती है, पेंडिंग बढ़ती है। कई जगह ऑनलाइन पेशी का सिस्टम तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़ा है।

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