– नेशनल हाईवे पर लगातार पेट्रोलिंग एवं मवेशियों को हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के दिए निर्देश
– ई-डीएआर पोर्टल में दुर्घटना प्रकरणों की समय पर एंट्री और 24 घंटे में सत्यापन के दिए निर्देश
– कलेक्टर ने ली जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक
राजनांदगांव । कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक लेकर जिले में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं सड़क सुरक्षा उपायों की समीक्षा की। कलेक्टर ने नेशनल हाईवे पर हुई दुर्घटना पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने एनएचएआई के अधिकारियों को नेशनल हाईवे पर लगातार पेट्रोलिंग करने तथा सड़क पर आने वाले मवेशियों को हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाईवे पर मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए नियमित निगरानी एवं आवश्यक कार्रवाई की जाए। कलेक्टर ने इन व्यवस्थाओं की लगातार मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। कलेक्टर ने नेशनल हाईवे के किनारे बन रहे सर्विस लेन के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने राज इम्पीरियल के सामने दुर्घटना संभावित क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था के लिए हाफ मास्ट लाइट लगाने तथा दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने दुर्घटना संभावित चौक-चौराहों एवं मार्गों का चिन्हांकन कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने कहा।
कलेक्टर ने कहा कि जिले में सड़क दुर्घटनाओं के कई मामलों की ई-डीएआर पोर्टल में समय पर एवं सही तरीके से प्रविष्टि नहीं हो रही है। इसके कारण दुर्घटना पीडि़तों को प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत मिलने वाले उपचार एवं स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्राप्त करने में कठिनाई होती है। उन्होंने संबंधित विभागों एवं अस्पतालों के कर्मचारियों को पोर्टल पर दुर्घटना प्रकरणों की प्रविष्टि की प्रक्रिया का आवश्यक प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद अस्पताल द्वारा प्रकरण की ऑनलाइन प्रविष्टि किए जाने के पश्चात पुलिस विभाग द्वारा निर्धारित समय-सीमा में उसका सत्यापन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को दुर्घटना से संबंधित प्रकरणों का सत्यापन 24 घंटे के भीतर करने तथा पूरी प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि पीडि़त को उपचार की सुविधा बिना विलंब मिल सके।
कलेक्टर ने प्रधानमंत्री राहत योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना पीडि़तों को मिलने वाले अधिकतम 7 दिवस तक के उपचार एवं 1 लाख 50 हजार रूपए तक के कैशलेस उपचार पैकेज की जानकारी दी गई। कलेक्टर ने जिले के सभी निजी अस्पतालों एवं ट्रॉमा सेंटरों से सड़क दुर्घटना के मामलों को प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत दर्ज कर पीडि़तों को योजना का लाभ दिलाने कहा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सभी शासकीय एवं निजी अस्पतालों के संबंधित कर्मचारियों को ई-डीएआर एवं प्रधानमंत्री राहत योजना की ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी देने के निर्देश दिए। साथ ही, प्रक्रिया को सरलता से समझाने के लिए एक वीडियो तैयार कर निजी अस्पतालों के समूहों में साझा करने को कहा, ताकि सभी अस्पतालों को प्रकरण दर्ज करने एवं सत्यापन की प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी मिल सके। उन्होंने दुर्घटना पीडि़तों को समय पर उपचार एवं पीएम – राहत योजना का लाभ दिलाने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, आरटीओ तथा निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में आरटीओ, यातायात पुलिस, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, मेडिकल कॉलेज एवं जिला अस्पताल के अधिकारी तथा निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
















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