रायपुर । झीरम घाटी कांड में सभी 10 नक्सली दोषी करार दिये गए हैं। इस मामले में 13 साल बाद फैसला सुनाया गया है। मामला जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में चल रहा था। 2013 के चर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में 5 सितंबर 2026 शनिवार को फैसला सुनाया गया। इस मामले में लंबे समय से चल रही सुनवाई की अंतिम दलीलें 12 अगस्त को पूरी हो गई थीं। इसके बाद अदालत को 31 अगस्त को फैसला सुनाना था, लेकिन फैसला टल गया था।
बता दें 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफिला सुकमा में बड़ी सभा के बाद लौट रहा था। इसी दौरान झीरम घाटी के घने जंगलों में हथियारबंद माओवादियों ने काफिले पर हमला कर दिया। इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 31 लोगों की मौत हुई थी।
मरने वालों में तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडूम के प्रमुख चेहरों में शामिल महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे। हमले में कई सुरक्षाकर्मी और कांग्रेस कार्यकर्ता भी मारे गए थे। गंभीर गोली लगने के बाद इलाज के दौरान विद्याचरण शुक्ल की भी मौत हो गई थी। एनआईए ने इस मामले में 25 सितंबर 2014 को पहली चार्जशीट दाखिल की थी।
इसमें गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों के नाम शामिल थे। इसके बाद दो और संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद एनआईए ने 28 सितंबर 2015 को 35 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की. मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई हुई, लेकिन इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। वहीं, 33 नामजद आरोपी अब भी फरार बताए गए हैं. अंतिम दलीलें पूरी होने से पहले अदालत ने कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए।















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