भोपाल
प्रशासनिक सुस्ती और नीतिगत विरोधाभास के कारण प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार पूरी तरह अटक गया है। एक तरफ 1521 करोड़ से दमोह, छतरपुर और बुधनी में बने मेडिकल कॉलेजों की इमारतें खड़ी हैं और डीन भी पदस्थ हैं।
अयोग्य घोषित होने के बाद न तो दोबारा आवेदन हुआ, न फैकल्टी भर्ती पूरी हुई और न फर्नीचर खरीदा गया; नतीजतन इस सत्र भी 300 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश बंद रहा।
दूसरी तरफ, 13 जिलों में प्रस्तावित पीपीपी मॉडल भी फ्लॉप साबित हुआ, जहां टेंडर के बावजूद 9 जिलों में एक भी निजी निवेशक नहीं आया और केवल 4 में बाउंड्रीवॉल का काम शुरू हो सका। तैयार सरकारी कॉलेजों को शुरू करने के बजाय उन्हें भी पीपीपी मोड में धकेलने की नीतिगत उधेड़बुन ने प्रदेश में डॉक्टरों की नई पौध पर ब्रेक लगा दिया है।
सरकारी मॉडल सुस्त: दमोह, छतरपुर और बुधनी में भवन तैयार, फिर भी एनएमसी से मंजूरी नहीं ली; डॉक्टरों की भर्ती भी नहीं
पीपीपी मॉडल फ्लॉप: 13 में से केवल 4 जिलों में काम शुरू, 8 जिलों में एक भी निवेशक नहीं आया; खरगोन का टेंडर निरस्त
दमोह, छतरपुर, बुधनी में इमारतें खड़ी पर कमियां अब भी
1. शासकीय कॉलेज: भवन खड़े, डीन पदस्थ, पर 300 सीटों पर ताला
दमोह, छतरपुर और बुधनी में मेडिकल कॉलेज की इमारतें तैयार हैं। डीन और सीनियर रेजिडेंट्स पदस्थ किए जा चुके हैं, लेकिन एनएमसी की पहली ही जांच में कमियां मिलने से इन्हें मान्यता नहीं मिली। डिस्क्वालिफाई होने के बाद शासन ने दोबारा आवेदन नहीं किया।
खरीदी और भर्ती बंद: जून से शुरू हुई फर्नीचर खरीदी अधूरी है और फैकल्टी भर्ती के परिणाम रोक दिए गए हैं।
कागजी टैगिंग: सरकार ने रिकॉर्ड में दिखाने के लिए छतरपुर को सागर और दमोह को जबलपुर स्वशासी कॉलेज से टैग (जोड़) दिया है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।
दमोह में अटका काम: सरकार 369 करोड़ रु खर्च कर चुकी है। नर्सिंग कॉलेज और 500 बेड का अस्पताल बनाने थे, जो रोक दी गई है। डीन डॉ. अर्जुन सिंह का कहना है शासन के आदेशानुसार आगे काम होगा।
बुधनी और छतरपुर: बुधनी में डीन डॉ. डी. परमहंस पदस्थ हैं और सीनियर रेजिडेंट्स नर्मदापुरम जिला अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। छतरपुर में डीन डॉ. अमरदीप राय ने प्रक्रिया शुरू की है, पर सुविधाएं नहीं जुटाई गई हैं।
2. पीपीपी मॉडल: 9 जिलों में निवेशकों का इंतजार, 4 में निर्माण की रफ्तार धीमी
प्रदेश के 13 जिलों- बैतूल, धार, पन्ना, कटनी, टीकमगढ़, शाजापुर, मुरैना, खरगोन, सीधी, बालाघाट, अशोकनगर, भिंड और गुना में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज मंजूर किए गए थे। इनमें से 9 जिलों में निवेशक न मिलने से काम अधर में लटक गया है। केवल 4 जिलों में निर्माण शुरू हुआ है।
धार: केवल यहीं पीपीपी मॉडल आगे बढ़ा, लेकिन जमीन विवाद के कारण प्रक्रिया प्रभावित रही और अब ग्राम पंचायत की एनओसी का इंतजार है।
पन्ना: पर्यटन ग्राम जनवार में 5 महीने से काम जारी है। बाउंड्रीवॉल का काम 80% पूरा हुआ है और पिलर खड़े किए जा रहे हैं।
कटनी: जिला अस्पताल पर आश्रित मेडिकल कॉलेज का स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है। विरोध के कारण सीएम के दो कार्यक्रम रद्द हुए; अब बिना औपचारिक भूमिपूजन के ही बाउंड्रीवॉल बनाई जा रही है।
बैतूल: यहां भी निर्माण कार्य अभी सिर्फ बाउंड्रीवॉल तक ही सीमित है।
दूसरी बार मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया
"छतरपुर, दमोह और बुधनी मेडिकल कॉलेज की अनुमति एनएमसी स्तर पर पेंडिंग है। एक बार डिस्क्वालिफाई होने के बाद मान्यता के लिए दोबारा आवेदन नहीं किया गया है।" — धनराजू एस., आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग















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