CG : वैवाहिक विवाद में हाई कोर्ट का अहम फैसला, मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक मंजूर …

CG : वैवाहिक विवाद में हाई कोर्ट का अहम फैसला, मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक मंजूर …

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पति को तलाक की डिक्री दे दी। अदालत ने कहा कि पत्नी द्वारा बार-बार विवाद करना, पति से अलग रहना और उसे आपराधिक मामले में फंसाना, परिस्थितियों को समग्र रूप से देखने पर मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आ सकता है। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें पति की तलाक याचिका खारिज कर दी गई थी। यह मामला विवेक अग्रवाल और सरिता अग्रवाल के बीच

वैवाहिक विवाद से जुड़ा है। दोनों का विवाह 12 दिसंबर 2014 को हुआ था। पति की ओर से आरोप लगाया गया कि विवाह के बाद पत्नी के व्यवहार के कारण घर में लगातार विवाद की स्थिति बनी रही। वह कई बार मायके चली जाती थी और पति के प्रयासों के बावजूद वैवाहिक संबंध सामान्य नहीं हो पाए। रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2019 से पत्नी अलग रह रही थी। पति ने अदालत के सामने यह भी कहा कि पत्नी ने उसके खिलाफ दहेज उत्पीड़न से जुड़ा आपराधिक मामला दर्ज कराया था। इस मामले में पति को 17 मार्च 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, पेंड्रा रोड की अदालत ने बरी कर दिया था। हाई कोर्ट ने इस घटनाक्रम सहित पूरे वैवाहिक व्यवहार को ध्यान में रखते हुए कहा कि पति ने मानसिक क्रूरता का आधार स्थापित कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी वैवाहिक विवाद में केवल एक घटना को अलग-अलग देखने के बजाय दोनों पक्षों के व्यवहार और परिस्थितियों को समग्र रूप से देखना जरूरी है। अदालत ने पाया कि लगातार झगड़े, बार-बार वैवाहिक घर छोड़ना, लंबे समय से अलग रहना और पति को ऐसे आपराधिक मामले में फंसाना जिसमें बाद में वह बरी हो गया, इन सभी परिस्थितियों ने पति के लिए वैवाहिक संबंध जारी रखना कठिन बना दिया था।

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मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने जिला न्यायाधीश, पेंड्रा रोड द्वारा 18 फरवरी 2025 को पारित आदेश को निरस्त कर दिया। निचली अदालत ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने इस आदेश को टिकाऊ नहीं माना और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत पति की याचिका स्वीकार कर ली। इसके साथ ही दोनों का विवाह अदालत के आदेश की तारीख से समाप्त करने का निर्देश दिया गया। फैसले का अर्थ यह नहीं है कि पत्नी द्वारा हर आपराधिक शिकायत दर्ज कराना अपने आप मानसिक क्रूरता माना जाएगा। अदालत का निष्कर्ष इस विशेष मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित था। दूसरे मामलों में भी अदालतें यह देखती हैं कि शिकायत की प्रकृति क्या थी, उसके पीछे परिस्थितियां क्या थीं और उसका वैवाहिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का यह फैसला वैवाहिक मामलों में मानसिक क्रूरता की व्याख्या को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मानसिक क्रूरता केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा लगातार व्यवहार भी इसके दायरे में आ सकता है जिससे पति या पत्नी के लिए वैवाहिक जीवन को जारी रखना अत्यंत कठिन हो जाए। इस मामले में हाई कोर्ट ने पति की अपील स्वीकार करते हुए तलाक की डिक्री जारी कर दी और निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया।

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