राजनांदगांव : कन्हारपुरी बाईपास का नाम मंदराजी दाऊ के नाम पर करने से कलाकारों में हर्ष…

राजनांदगांव : कन्हारपुरी बाईपास का नाम मंदराजी दाऊ के नाम पर करने से कलाकारों में हर्ष...

मितान लोक कलाकार कल्याण संघ ने महापौर का जताया आभार

राजनांदगांव । नगर निगम द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 43 में सीआईटी कॉलेज से शुरू होने वाले कान्हारपुरी बाईपास रोड का नामकरण नाचा के शीर्ष पुरुष मंदराजी दाऊ के नाम पर करने पर मितान लोक कलाकार कल्याण संघ ने महापौर मधुसूदन यादव का आभार व्यक्त किया है ।
कन्हारपुरी बाईपास रोड का नामकरण मंदराजी दाऊ के नाम पर होने से समूचे छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों में हर्ष व्याप्त है । उल्लेखनीय है कि सीआईटी तिराहे के पास विशाल चौक का निर्माण होने पर मितान लोक कलाकार कल्याण संघ के अध्यक्ष राजेश मारू के नेतृत्व में सर्वप्रथम कलाकारों ने चौक का नाम मंदराजी दाऊ के नाम पर करने के लिए ज्ञापन सौंपा था ।

चौक के नामकरण ने तकनीकी समस्या आने पर मितान लोक कलाकार कल्याण संघ ने महापौर से बाईपास का नाम मंदराजी दाऊ के नाम पर करने का आग्रह किया था समय समय पर महापौर का ध्यान आकृष्ट कराते रहे । मितान की पहल का सम्मान करते हुए शुक्रवार को नगर निगम की सामान्य सभा की बैठक में कन्हारपुरी बाईपास रोड का नामकरण मंदराजी दाऊ के नाम पर करने का निर्णय लिया गया । मितान लोक कलाकार कल्याण संघ राजनांदगांव के अध्यक्ष राजेश मारू, सचिव बीरेंद्र बहादुर सिंह, महादेव हिरवानी, दीपेश साव, महेश्वर दास साहू, नरेंद्र साहू, विष्णु कश्यप, दीपक महोबिया बलेश्वर साव एवं प्रवीण साव समेत छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों ने हर्ष करते हुए महापौर का आभार व्यक्त किया है । कलाकारों ने कहा है कि बाईपास रोड का नामकरण मंदराजी दाऊ के नाम पर करना छत्तीसगढ़ के समस्त लोककला साधकों का सम्मान है ।

See also  ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में छत्तीसगढ़ का बड़ा सुधार, भूमि उपयोग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव

कौन थे मंदराजी दाऊ ?

उल्लेखनीय है कि दुलार सिंह साव उर्फ मंदराजी दाऊ ने छत्तीसगढ़ी लोक नाट्य नाचा के उन्नयन में अपना पूरा जीवन खपा दिया था । कन्हारपुरी के समीप ग्राम रवेली के मंदराजी दाऊ ने 30 से 40 के दशक में अपनी विख्यात रवेली नाचा पार्टी के माध्यम से खड़े साज वाले नाचा को वर्तमान स्वरूप प्रदान किया । चिकारा के स्थान पर हारमोनियम और मशाल की जगह पेट्रोमेक्स का प्रचलन उन्होंने ही प्रारंभ किया था । वे नाचा के स्वरूप और गम्मत को लगातार परिष्कृत और परिमार्जित करते रहे ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *