जबलपुर
जबलपुर में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए 40 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर नरेंद्र रजक की जिंदगी तो नहीं बचाई जा सकी, लेकिन उनके परिवार के एक साहसिक और संवेदनशील फैसले ने कई लोगों को नया जीवन देने की उम्मीद जगा दी. ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद पत्नी पूजा रजक और परिजनों ने नरेंद्र के अंगदान का निर्णय लिया।
इसके बाद अस्पताल प्रशासन, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई. नरेंद्र का हार्ट और लीवर विशेष चार्टर्ड विमान से अहमदाबाद भेजा गया, जबकि उनकी दोनों किडनी का प्रत्यारोपण जबलपुर में किया जाएगा. इसके अलावा आंखें और स्किन भी दान की गई हैं. नरेंद्र रजक मूल रूप से जबलपुर के गुप्तेश्वर क्षेत्र के निवासी थे और नागपुर की एचसीएल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे।
जबलपुर लौटते समय किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मारी
परिवार में पत्नी पूजा रजक, 12 वर्षीय बेटी भूमिका और आठ वर्षीय बेटा देवांश हैं. परिजनों के मुताबिक नरेंद्र 31 अक्टूबर को रिश्तेदारों के यहां गंगा पूजन कार्यक्रम में शामिल होने मनकेड़ी-कुआखेड़ा गए थे. वहां से जबलपुर लौटते समय किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी. हादसे में गंभीर रूप से घायल नरेंद्र को उपचार के लिए मेट्रो प्राइम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत लगातार गंभीर बनी रही।
चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया. नरेंद्र के ब्रेन डेड होने की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से अंगदान की संभावनाओं पर चर्चा की. इस कठिन परिस्थिति में पत्नी पूजा रजक ने परिवार के साथ मिलकर अंगदान की सहमति दी. एक तरफ परिवार अपने प्रिय सदस्य को खोने के गम से गुजर रहा था।
दूसरों की जिंदगी बचाने का फैसला बना मिसाल
वहीं दूसरी तरफ दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए लिया गया यह निर्णय समाज के सामने एक मिसाल बन गया. पूजा रजक ने कहा कि उनके परिवार की जिंदगी तो खत्म हो गई, लेकिन नरेंद्र के अंग किसी दूसरे परिवार में खुशियां लौटा सकते हैं. उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिन मरीजों को ब्रेन डेड घोषित किया जाता है, उनके परिजनों को अंगदान के बारे में जरूर विचार करना चाहिए।
पूजा रजक ने कहा कि दुनिया में पैसा देकर बहुत कुछ खरीदा जा सकता है, लेकिन किसी को जीवन देने वाले अंग नहीं खरीदे जा सकते. यदि हमारे परिवार के सदस्य के अंग किसी दूसरे व्यक्ति के काम आ सकते हैं तो इससे बड़ा पुण्य और क्या हो सकता है. उन्होंने कहा कि नरेंद्र का शरीर अब किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी बचाने के काम आएगा, यही उनके परिवार के लिए सबसे बड़ा संतोष है।
हादसे वाले दिन नरेंद्र ने हेलमेट नहीं लगाया था
नरेंद्र की पत्नी पूजा रजक ने एक भावुक बात साझा करते हुए बताया कि नरेंद्र हमेशा बाइक चलाते समय हेलमेट पहनते थे, लेकिन हादसे वाले दिन उन्होंने हेलमेट नहीं लगाया था. पूजा का कहना है कि अगर उस दिन नरेंद्र ने हेलमेट पहना होता तो शायद आज वह उनके बीच जिंदा होते. परिवार को इस बात का गहरा अफसोस है।
अंगदान की प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के लिए जबलपुर में ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए. मेट्रो प्राइम अस्पताल के डॉक्टर राजीव बड़ेरिया ने बताया कि हार्ट और लीवर को अहमदाबाद पहुंचाने के लिए अस्पताल से डुमना एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया. वहीं किडनी को मेडिकल कॉलेज जबलपुर और मेट्रो प्राइम अस्पताल तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था की गई।
60 से 68 डॉक्टरों की टीम ने निकाले अंग
अंगों को निकालने और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में अस्पताल की लगभग 60 से 68 डॉक्टरों की टीम जुटी रही. अहमदाबाद से भी तीन डॉक्टरों की टीम जबलपुर पहुंची. इसके अलावा मेडिकल कॉलेज की टीम ने भी अंगदान की प्रक्रिया में सहयोग किया. नरेंद्र की एक किडनी मेडिकल कॉलेज जबलपुर और दूसरी किडनी मेट्रो प्राइम अस्पताल में प्रत्यारोपित की जाएगी।
हार्ट और लीवर अहमदाबाद के अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों को लगाए जाएंगे. उनकी आंखें और स्किन भी दान की गई हैं. मेडिकल कॉलेज जबलपुर में उपलब्ध स्किन बैंक की सुविधा के माध्यम से स्किन को सुरक्षित करने की प्रक्रिया की गई. अंगदान की इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती हार्ट और लीवर को समय रहते अहमदाबाद पहुंचाना था।
टीम को अंगों के साथ वापस लौटना था, लेकिन…
अहमदाबाद से आई टीम को अंगों के साथ वापस लौटना था, लेकिन रात के समय डुमना एयरपोर्ट बंद रहने और नियमित नाइट लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण परेशानी सामने आई. अस्पताल प्रबंधन ने इस समस्या से जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया. इसके बाद कलेक्टर और सांसद के स्तर पर तत्काल प्रयास किए गए।
एविएशन अधिकारियों से समन्वय कर विशेष चार्टर्ड विमान की लैंडिंग और उड़ान के लिए एयरपोर्ट खुलवाने की व्यवस्था की गई. इसके बाद अहमदाबाद से आया विशेष विमान डुमना एयरपोर्ट पहुंचा और हार्ट तथा लीवर को विमान के जरिए अहमदाबाद रवाना किया गया. अहमदाबाद के मारेंगो सिम्स अस्पताल से पहुंचे डॉक्टर चिंतन सेठ ने बताया कि उनकी टीम हार्ट और लीवर को रिट्रीव करने के लिए जबलपुर आई थी. टीम में तीन डॉक्टर शामिल थे.।
पूरी प्रक्रिया को तेजी और सावधानी से की गई
चिंतन सेठ ने बताया कि हार्ट प्रत्यारोपण के लिए अहमदाबाद में 57 वर्षीय मरीज इंतजार कर रहा है. अंगदान के मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. अंगों को जितनी जल्दी सुरक्षित तरीके से निकालकर प्रत्यारोपण केंद्र तक पहुंचाया जाता है, सफलता की संभावना उतनी ही बेहतर रहती है. इसी वजह से पूरी प्रक्रिया को तेजी और सावधानी के साथ पूरा किया गया।
एसडीएम मदन रघुवंशी ने क्या बताया?
एसडीएम मदन रघुवंशी ने बताया कि नरेंद्र रजक के परिजनों ने अंगदान का ऐतिहासिक निर्णय लिया. हार्ट और लीवर को अहमदाबाद भेजने के लिए प्रशासन ने तत्काल चार्टर्ड विमान की व्यवस्था सुनिश्चित कराई. अस्पताल से डुमना एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. वहीं किडनी को मेडिकल कॉलेज पहुंचाने के लिए भी अलग कॉरिडोर तैयार किया गया. पुलिस के वाहन अंगों को ले जाने वाले वाहनों के आगे तैनात रहे, ताकि रास्ते में यातायात बाधित न हो और अंगों को बिना किसी देरी के निर्धारित अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके.
नरेंद्र रजक अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके परिवार के फैसले ने उनके जाने के बाद भी उन्हें कई जिंदगियों से जोड़ दिया है. एक परिवार ने अपना सदस्य खोया है, लेकिन अंगदान के इस फैसले से दूसरे परिवारों को अपनों के साथ जिंदगी बिताने का एक नया अवसर मिलने जा रहा है.

















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