राजनांदगांव : 16 साल से पॉकेट मनी से गरीब बच्चों की दीपावली रोशन कर रहे युवा, पेश की मिसाल…

राजनांदगांव : 16 साल से पॉकेट मनी से गरीब बच्चों की दीपावली रोशन कर रहे युवा, पेश की मिसाल...

राजनांदगांव , दिवाली पर हर घर में खुशियों के दीप जलते हैं, लेकिन कुछ घर ऐसे भी हैं जहां आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की खुशियां अधूरी रह जाती हैं। ऐसे ही बच्चों की दिवाली रोशन करने स्वामी विवेकानंद युवा जागृति मंच 16 साल से अनूठी पहल कर रहा है। खास बात यह है कि मंच के सदस्य सेवा कार्य के लिए किसी से चंदा नहीं लेते, अपनी पॉकेट मनी से बच्चों के लिए नए कपड़े, मिठाइयां और जरूरत का सामान खरीदते हैं। दिवाली से पहले झुग्गी बस्तियों का इसका वितरण करते है।

साल 2010 में महज 10 बच्चों से शुरू हुआ यह सिलसिला अब करीब 200 बच्चों तक पहुंच चुका है। इस बार 186 बच्चों की सूची तैयार हो चुकी है। वहीं 25 अक्टूबर से वितरण शुरू किया गया है। दिवाली में बाजारों में खरीदारी और घरों में सजावट की रौनक रहती है, लेकिन जरूरतमंद गरीब बच्चों के लिए नए कपड़े, मिठाइयां सपना बनकर रह जाते हैं। इसी अंतर को कम करने साल 2010 में गरीब बच्चों के साथ सार्थक दिवाली मनाने शुरुआत की थी। प्रदेश अध्यक्ष जीवन साहू, संरक्षक संजय शर्मा, रितेश यादव, जिला अध्यक्ष आदित्य पराते का सहयोग रहता है।

इस बार 200 से ज्यादा बच्चों को बांटने का लक्ष्य मंच के प्रदेश अध्यक्ष जीवन कुमार साहू ने बताया कि वर्ष 2010 में 10 बच्चों की मदद से शुरुआत के साथ हर साल बच्चों की संख्या बढ़ती गई। पिछले साल 156 बच्चों तक सामग्री पहुंची। इस बार अब तक 186 बच्चों की सूची तैयार की जा चुकी है। संख्या 200 तक पहुंचने की संभावना है। मंच के सदस्य जरूरतमंद बच्चों की पहचान के लिए घर-घर जाकर जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद एक से 16-17 वर्ष तक के बच्चों की सूची बनाकर उनके कपड़ों का माप लिया जाता है। कोशिश रहती है कि हर बच्चे को सही कपड़े मिले। े

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दिवाली से 10 दिन पहले शुरू किया गया वितरण मिठाई और जरूरत का अन्य सामान भी दिया जाता है। वितरण दिवाली से 10 दिन पहले शुरू कर दिया जाता है। पूरी व्यवस्था मंच के सदस्य खुद संभालते हैं। मंच की पहल सिर्फ इस पर्व में उपहार देने तक सीमित नहीं है। सदस्यों को ऐसे बच्चों की जानकारी भी है, जिनके परिवार में माता या पिता का सहारा नहीं है। ऐसे बच्चों को निशुल्क कंप्यूटर एवं तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के साथ स्किल डेवलपमेंट के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना काम होना चाहिए।

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