पटेवा ग्राम पटेवा में शिव महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के द्वितीय दिवस पर शिवलिंग प्राकट्य एवं कुबेर चरित्र का विस्तार पूर्वक वर्णन करते हुए कथावाचक आचार्य हरिश चतुर्वेदी ने अपने संगीत मय कथा के माध्यम से बताया कि सत्य हमेशा कड़वा होता है। अत: सत्य के साथ मीठा भी बोलना चाहिए। शिव की कथा का श्रवण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ब्रम्ह को हृदय में स्थापित करना ही भगवान की कथा है।
भगवान शंकर की महाशिवरात्रि के दिन पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है जिसमें रात्रि 12बजे की पूजा सर्वोत्तम होती है। प्रथम शिवलिंग की उत्पत्ति अगहन मास में हुआ,इसलिए इस माह को शुभ माना जाता है। घर में भी यदि चल शिवलिंग की स्थापना की जा सकती है किन्तु वह शिवलिंग एक ऊंगली से बड़ा नहीं होना चाहिए और अचल शिवलिंग 12 ऊंगली से बड़ा होना चाहिए। भगवान शिव की पूजा प्रतिदिन यथाशक्ति अनुसार करना चाहिए। भगवान शिव की पूजा में पांचबत्ती युक्त करना चाहिए।
पूजा करते समय पुरुष को नम: शिवाय एवं महिलाओं को शिवाय नम: तथा जनेऊ धारी एवं रुदाक्ष धारण किए हुए व्यक्ति को ऊं नम: शिवाय का जाप करना चाहिए। शिव पुराण में सबसे उत्तम भूखे को भोजन देना, सर्वश्रेष्ठ माना गया है। दान सच्चे एवं पवित्र मन से करना चाहिए। कुत्ते को घर के अंदर रखना अपवित्र माना गया है। अत: मनुष्य को कुत्ते को घर से अलग रखना चाहिए।
