रायपुर : वर्मी कम्पोस्ट और सब्जी उत्पादन से सबल होते समूह

छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना के तहत  बने गौठान और गोधन न्याय योजना से गांवों में रोजगार और स्वावलंबन का नया आधार विकसित हुआ है। गौठानों में पशुधन के देखरेख, चारे-पानी का निःशुल्क प्रबंधन के साथ-साथ गोबर की खरीदी से महिला समूहों को वहां सहजता से रोजगार मिलने लगा है। महिला समूह गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के साथ ही आय की अन्य गतिविधियों को अपनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं।   
कोरबा जिले के पाली विकासखण्ड के ग्राम सेन्द्रीपाली गौठान से जुड़ी महामाया महिला स्व-सहायता समूह और पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड के ग्राम महोरा भावर गौठान की सांई स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने वर्मी खाद के उत्पादन और सब्जी की खेती कर अच्छी-खासी आय अर्जित करने लगी हैं।
महामाया महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती राजकुमारी कोराम ने बताया कि उनके समूह से कुल 13 महिलाएं जुड़ी हैं। वर्मी कम्पोस्ट एवं सब्जी के उत्पादन से समूह को एक लाख 58 हजार 630 रूपए का लाभ प्राप्त हो चुका है। समूह से जुड़ी महिलाओं इससे अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही अपने लिए पायल, अंगूठी व अन्य गहनों की भी खरीदी की है।
 इसी तरह सांई स्व-सहायता समूह ने वर्मी खाद के उत्पादन से एक लाख 20 हजार रूपए तथा सब्जी की खेती कर एक लाख 10 हजार रूपए का मुनाफा अर्जित किया है। वर्मी के उत्पादन के लिए उन्हें प्रशिक्षण और शासन की ओर से रिवाल्विंगफंड के रूपये 20-20 हजार रूपए मिले थे, जिसका उपयोग उन्होंने सब्जी की खेेती के लिए जुताई व बीज क्रय करने में किया। वर्मी कम्पोस्ट और सब्जी उत्पादन से हुए मुनाफे से प्रसन्न समूह की महिलाएं अब इस काम को बढ़ाने में जुटी हैं। महिलाओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार के गौठान और गोधन न्याय योजना से उन्हें संबल मिला है। उनके जीवन में नया बदलाव आया है।

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