राजनांदगांव कांग्रेस शासन काल में सेवा सहकारी समितियों ने किसान सम्मेलन के नाम पर केवल मौखिक आदेश पर 3 से 4 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। शिकायत के बाद उपपंजीयक सहकारी संस्थाएं की ओर से हिसाब मांगा जा रहा है तो समिति प्रबंधक टालमटोल कर रहे हैं।
नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया था पर हिसाब नहीं मिलने पर उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं ने इसकी जांच शुरू करा दी है। सहकारी विस्तार अधिकारियों के माध्यम से हर सोसाइटियों में खर्च का हिसाब लिया जाएगा। इस तरह समिति प्रबंधक अब फिजूलखर्ची के इस मामले में बच नहीं पाएंगे। जिला पंचायत की बैठक में शिकायत सामने आई थी कि सेवा सहकारी समितियों ने बिना कोई लिखित आदेश के किसान सम्मेलन और अन्य कार्यक्रमों के नाम पर राशि खर्च की है।
वहीं केवल मौखिक आदेश पर ही समितियों ने तीन से चार लाख रुपए तक फूंक डाले जबकि समितियों के पास वेतन देने के लिए भी फंड की कमी रहती है। तत्कालीन कांग्रेसी नेताओं और अफसरों के कहने पर राशि तो खर्च कर दी पर अब समिति प्रबंधक बुरे फंस गए हैं।
शिकायत के बाद उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं शिल्पा अग्रवाल ने जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के सीईओ को पहले पत्र लिखकर खर्च की जानकारी मंगाई। सीईओ ने समिति प्रबंधकों को पत्र जारी किया पर माहभर बीतने आएं हैं। किसी भी प्रबंधकों की ओर से खर्च का ब्योरा नहीं दिया गया है। इसके चलते प्रबंधकों की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है।
