इंदौर में 25-30 प्रतिशत तक महंगी होगी प्रॉपर्टी,प्रस्ताव तैयार 

इंदौर
प्रदेश में आगामी 1 अप्रैल से गाइडलाइन बढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए इंदौर समेत सभी 52 जिलों ने बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार कर लिए हैं। प्रस्ताव जल्द ही जिला मूल्यांकन समिति के समक्ष रखा जाएगा। प्रारंभिक तौर पर प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद कलेक्टर ने गाइडलाइन वास्तविक बाजार मूल्य और विकास कार्यों के अनुपात में बढ़ाने का फरमान जारी किया है, जिसके अनुसार विभाग ने महानगरीय निवेश क्षेत्र, मध्यक्षेत्र में स्मार्ट सिटी एरिया और नए विकसित हो रहे क्षेत्रों में 25-30 प्रतिशत बढ़तरी प्रस्ताव तैयार किए हैं। वहीं, सरकार ने रीयल एस्टेट से भर रहे खजाने को देखते हुए जहां जरूरी है, वहीं गाइडलाइन बढ़ाने का फार्मूला तय किया है। जिले में जमीनों के दाम हर साल की तरह इस साल भी नए सिरे से तय करने का अभ्यास चल रहा है। एक-दो दिन में जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगेगी। उप जिला मूल्यांकन समिति ने सर्वे और मुख्यालय से संपदा के आधार पर बढ़ोतरी क्षेत्र की आकलन रिपोर्ट के आधार पर दाम तय किए हैं। जानकारी के अनुसार इस साल प्रशासन का रूख गाइडलाइन में बढ़ोतरी का है। कलेक्टर ने प्रारंभिक प्रस्तावों को देखने के बाद निर्देश देते हुए महानगरीय निवेश क्षेत्रों और स्मार्ट सिटी एरिया के दामों के पुर्ननिर्धारण करने के लिए कहा है। साथ ही पंजीयन विभाग द्वारा शहर में निकाले गए प्रॉपर्टी प्रायरिटी एरिया में विकसित हो रही टाउनशिप और कॉलोनियों के दामों में भी समुचित वृद्धि की जा रही है। सूत्र बताते हैं, हाल ही में भोपाल में एक उच्च स्तरीय बैठक में भी रीयल एस्टेट बाजार की समीक्षा की गई है। इसमें इस साल प्रदेश में हुई रजिस्ट्री और इससे होने वाली आय का आकलन किया गया। इसके आधार पर गाइडलाइन प्रस्तावों के लिए अंतिम दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं, जिसके अनुसार गाइडलाइन बाजार मूल्य के अनुरूप व्यावहारिक बनाने के लिए कहा गया है।

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कृषि भूमि में बदलाव की उम्मीद
बताया जा रहा है, बैठक में कृषि भूमि की रजिस्टियों के लिए अलग-अलग राज्यों के मॉडल पर भी चर्चा हुई, जिसके आधार पर महानगरों में गणना स्लैब में बदलाव पर विचार चल रहा है। वर्तमान में शहरों के आसपास सिंचिंत व असिंचित का अंतर तो बहुत कम या लगभग बराबर है।

कम करने की भी दी आजादी
इस बार गाइडलाइन में एक और प्रयोग हो सकता है। जिन क्षेत्रों में रजिस्ट्री नहीं हो रही, वहां कम करने की भी आजादी है। इसलिए ऐसे क्षेत्र भी तलाशे जा रहे हैं, जहां बहुत कम रजिस्ट्री हो रही है। दाम भी बाजार मूल्य से ज्यादा है।
 

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