जबलपुर
 मप्र हाईकोर्ट ने बीपीएल कार्ड पर अहम टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा है कि बीपीएल का लाभ अभ्यर्थी को तभी दिया जाना चाहिए, जब यह किसी पद के लिए रिक्तियों के विज्ञापन की तारीख से पहले बनाया गया हो। रिक्तियों के विज्ञापन के बाद बने बीपीएल कार्ड को किसी व्यक्ति को बीपीएल कार्ड धारक का लाभ देने के लिए नहीं माना जाना चाहिए।

अभ्यर्थी के 10 नंबर कर दिए रद्द

इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती में एक अभ्यर्थी को उसके बीपीएल कार्ड के आधार पर दिए गए 10 अतिरिक्त अंक रद्द कर दिए। याचिकाकर्ता सविता ने कहा कि उसने निमाड़ी जिले के ग्राम काका देही में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में भर्ती के लिए आवेदन किया था। अपनी याचिका में प्रतिवादी शांति कुशवाह को बीपीएल कार्ड के कारण 10 अतिरिक्त अंक दिए गए और उनका चयन हो गया।

उन्होंने तर्क दिया कि सविता का बीपीएल कार्ड 16 मार्च, 2024 को पद विज्ञापित होने के बाद प्राप्त हुआ था। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च, 2024 थी और उनका बीपीएल कार्ड 24 मार्च को बनाया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी दस्तावेज का लाभ उम्मीदवार को दिया जाना चाहिए जो किसी पद के लिए रिक्तियों के विज्ञापन के दिन उम्मीदवार के पास हो। जब पद के लिए विज्ञापन दिया गया था तब प्रतिवादी के पास बीपीएल कार्ड नहीं था, लेकिन बाद में उसने 10 अतिरिक्त अंक पाने के लिए बीपीएल कार्ड प्राप्त कर लिया, जो उचित नहीं है और उसे 10 अतिरिक्त अंक नहीं दिए जाने चाहिए।

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की पीठ ने जनहित याचिका मंजूर करते हुए प्रतिवादी को उसके बीपीएल कार्ड के कारण दिए गए 10 अंक रद्द करने का आदेश दिया।

By kgnews

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