प्रदेश में प्री-मानसून की बारिश का दौर,मालवा-निमाड़ में सबसे ज्यादा पानी गिरा

भोपाल

प्रदेश में प्री-मानसून की बारिश का दौर जारी है। भोपाल के होशंगाबाद रोड क्षेत्र में शाम को तेज बारिश हुई। काली घटाएं ऐसी उमड़ कर आई कि अंधेरा छा गया। लोग अपने वाहनों की लाइट जलाकर सड़क से गुजरे। इधर, बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली। इससे पहले सोमवार दोपहर छिंदवाड़ा, रतलाम, बैतूल, उज्जैन और ग्वालियर में तेज हवाओं से साथ बारिश हुई। बता दें कि पिछले 2 दिनों से इंदौर और उज्जैन समेत मालवा-निमाड़ के कई जिलों में बारिश हुई है।

3 दिन बाद आ सकता है मानसून

मध्यप्रदेश में मानसून तीन दिन बाद आ सकता है। रविवार को ग्वालियर में सबसे ज्यादा तापमान 44 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, लेकिन बादलों ने भोपाल और इंदौर में गर्मी से राहत दी। मौसम वैज्ञानिक पीके साहा के मुताबिक सोमवार को बादल छंटने से टेम्प्रेचर बढ़ेगा, लेकिन इससे लोकल सिस्टम भी बनेगा और इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम समेत कुछ शहरों में सोमवार शाम तक बारिश हो सकती है। अगले 24 घंटे में प्रदेश के कई शहरों में झमाझम बारिश हो सकती है।

पिछले साल मानसून की एंट्री अरब सागर और बंगाल की खाड़ी यानी दोनों ब्रांच से एक साथ हुई थी। इस बार बंगाल की खाड़ी ब्रांच ज्यादा एक्टिव नहीं हुई। अरब सागर ब्रांच एक्टिव होने से खंडवा और मालवा-निमाड़ रीजन में प्री-मानसून एक्टिविटी ज्यादा तेज है। इसलिए वहां अच्छी बारिश हो रही है।

मालवा-निमाड़ में सबसे ज्यादा पानी गिरा
सबसे ज्यादा मालवा-निमाड़ को प्री-मानसून ने भिगोया। बड़वानी के सेंधवा में सवा 3 इंच तक पानी गिर गया। एक दिन पहले खंडवा में सवा तीन इंच बारिश हुई थी। बड़वानी के चाचरीयापाटी और उज्जैन के तराना और वेधाशाला, महिदपुर और शहर में में 2-2 इंच, अलीराजपुर के जोबट में डेढ़ इंच, झाबुआ के मेघनगर और पचमढ़ी में 1-1 इंच तक पानी गिरा। रतलाम, देवास, बैतूल, खरगोन, इंदौर, बुरहानपुर, विदिशा, भोपाल के बैरागढ़, छिंदवाड़ा, सिवनी, शहडोल, दमोह और सागर में बारिश हुई।

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इन इलाकों में तापमान हाई

ग्वालियर के अलावा कुछ शहरों में तापमान 40 के पार रिकॉर्ड हुआ। खजुराहो, नरसिंहपुर, नौगांव, सतना और उमरिया में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहा।

मुंबई, पुणे समेत मध्य महाराष्ट्र पहुंच चुका मानसून

मानसून मध्यप्रदेश में अरब सागर ब्रांच के जरिए इंदौर संभाग से एंट्री ले सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मानसून की बंगाल की खाड़ी वाली ब्रांच सक्रिय नहीं हुई है, जबकि अरब सागर वाली ब्रांच सक्रिय है। इसलिए 15 या 16 जून के आसपास मानसून मध्यप्रदेश पहुंच सकता है। पिछले 24 घंटे में प्रदेश का 50% हिस्सा प्री-मानसून बौछारों से तर हो गया।

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