दुर्ग। बोरसी में 10 साल पहले 56 लाख खर्च कर हायर सेकंडरी स्कूल के लिए 6 कमरों की बिल्डिंग बनाई गई। अब तक बिल्डिंग में कक्षाएं नहीं लगी है। वहीं मेंटेनेंस के नाम पर अब तक 10 लाख रुपए और खर्च किए जा चुके हैं। हाई और हायर सेकंडरी की कक्षाएं अभी तक बोरसी चौक स्थित प्राइमरी और मिडिल स्कूल मेंं ही लग रही हैं। शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि बिल्डिंग में पर्याप्त कमरे नहीं है और दूर भी है। इसलिए हाई और हायर सेकंडरी स्कूल को नए भवन में अब तक शिफ्ट नहीं किया जा सका है।

बोरसी में जिस समय हायर सेकंडरी स्कूल को स्वीकृति दी गई, भवन नहीं होने की वजह से बोरसी चौराहे की प्राइमरी और मिडिल स्कूल बिल्डिंग में कक्षाएं लगाई जाने लगी। बाद में शिक्षा विभाग ने बस्ती के आउटर इलाके में 10 साल पहले 6 कमरों की बिल्डिंग बनाई, लेकिन अभी तक हाई और हायर सेकंडरी स्कूल वहां शिफ्ट नहीं हुआ है। जबकि वहां एक शिफ्ट में लगभग 240 विद्यार्थी पढ़ सकते हैं। यदि स्कूल का संचालन दो शिफ्ट में किया जाए तो इनकी संख्या 480 तक पहुंच जाएगी। लेकिन अधिकारी कई कारण गिनाते हुए इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं।

शिक्षक संघ ने नए भवन में कक्षा लगाने की मांग की इधर 10 साल बाद भी बोरसी हायर सेकंडरी स्कूल नए भवन में संचालित नहीं होने पर छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक संघ ने संयुक्त संचालक दुर्ग संभाग को पत्र लिखा है। जिसमें संघ के प्रांतीय मंत्री रुद्र नारायण सिन्हा ने बताया कि लगभग 10 वर्ष पूर्व शाला उच्चतर माध्यमिक शाला का नवीन भवन बन चुका है। इस दौरान स्कूल के जितने भी प्राचार्य हुए बहानेबाजी कर अब तक स्कूल को नए भवन में शिफ्ट नहीं किया है। जबकि नए भवन में स्कूल लगने से शिक्षण की अवधि बढ़ जाएगी। नए भवन में स्कूल लगने से बच्चों की पढ़ाई बेहतर हो सकेगी।

स्कूल बिल्डिंग जर्जर, मवेशियों का दिनभर जमावड़ा रहता है कक्षाएं नहीं लगने से स्कूल भवन खाली पड़ा है और जर्जर होने लगा है। लोगों ने बिजली सप्लाई लाइन उखाड़ दी है। दिन ढलते ही असामाजिक तत्वों का डेरा लगता है। भास्कर रिपोर्टर बिल्डिंग का मुआयना करने पहुंचा तब एक कमरे के अंदर मवेशी बैठे मिले। आसपास गोबर फैला हुआ था। लोहे के दरवाजों में जंग लगने लगी है। कई कमरे तो बिना दरवाजे के मिले। 6 में से केवल दो कमरे की हालत ठीक है। जो एक एनजीओ के कब्जे में है।

पर्याप्त कमरे नहीं होने और दूरी शिफ्टिंग में अड़ंगा बना ^हायर सेकंडरी स्कूल संचालन के लिए नए भवन में जितने कमरे होने चाहिए, उतने पर्याप्त नहीं है। जिसके कारण स्कूल को शिफ्ट नहीं किया जा रहा। इसके अलावा दूरी भी शिफ्टिंग में अड़ंगा बन रहा है। जब स्कूल बिल्डिंग का प्रस्ताव बनाया जा रहा था उस वक्त दूरी का ध्यान रखा जाना था। जे मनोहरन, एडीओपी समग्र शिक्षा, दुर्ग

कई वर्षों तक कागजों में ही दिखा दिया मेंटेनेंस का काम बोरसी हायर सेकंडरी स्कूल बिल्डिंग में बीते 10 वर्षों से कक्षाएं नहीं लगी है लेकिन भवन के रखरखाव के लिए 10 लाख से अधिक खर्च होने की जानकारी सामने आ रही है। यह खर्च एक साल में न कर अलग-अलग वर्षों में किस्तों में की गई। हालांकि मेंटेनेंस भवन की हालत को दुरुस्त रखने की गई लेकिन अवलोकन के दौरान ऐसा कहीं से नहीं लगा कि मरम्मत का कार्य किया गया है। यानि रखरखाव का काम कागजों पर कर दिया गया।

स्कूल बिल्डिंग बनाते समय शौचालय का भी निर्माण किया गया था, जो देखरेख नहीं होने से टूट-फूट कर जर्जर हो चुका है। इसका दरवाजा चोरी हो गया है। शिक्षा विभाग पहले बने शौचालय को तो नहीं सहेज पाया। 8 महीने पहले स्कूल भवन परिसर में एक और शौचालय का निर्माण करा दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब यह कक्षाएं ही नहीं लग रही है तो शौचालय का क्या उपयोग।

By kgnews

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