DAVV में तीन राउंड की काउंसलिंग पूरी, एमएड में 55 फीसद सीटें खाली

 इंदौर
लगातार एमएड पाठ्यक्रम का खराब रिजल्ट आने से प्रवेश पर बुरा असर पड़ा है। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्यता प्राप्त कोर्स में प्रवेश को लेकर तीन चरण की काउंसलिंग हो चुकी है। बावजूद इसके एमएड पाठ्यक्रम में 55 फीसद सीटें अभी खाली है। इसके चलते कालेजों की चिंताएं बढ़ने लगी है। वहीं 200 किमी दूर वाले कालेज मिलने से विद्यार्थी सीट आवंटन होने के बावजूद प्रवेश लेने में रूचि नहीं दिखा रहे है।

17 मई से बीएड-एमएड, बीपीएड, एमपीएड, बीएबीएड, बीएससीबीएड सहित अन्य कोर्स में प्रवेश को लेकर प्रक्रिया शुरू हुई। लगभग 65 हजार सीटों के लिए काउंसलिंग चल रही है। एमएड की 3350 में से 1512 सीटों पर प्रवेश हो चुका है। जबकि अभी तक तीन चरण की काउंसलिंग खत्म हो चुकी है। अभी 1838 सीटों पर प्रवेश होना है, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग ने काउंसलिंग का सिर्फ एक अतिरिक्त चरण दिया है। इसमें एमएड की 55 फीसद सीट भरना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि 2 जुलाई तक नए पंजीयन हो सकेंगे। अकेले इंदौर जिले में आने वाले सात कालेजों में एमएड पाठ्यक्रम संचालित होता है। जहां 400 में से 229 सीटें खाली है। इन कालेजों में 42 फीसद सीटों पर प्रवेश हुआ है।

कालेजों संचालकों की चिंताएं इसलिए बढ़ गई है कि विभाग की आवंटन प्रक्रिया में काफी विसंगति है। विद्यार्थियों को जिले के बाहर वाले कालेज आवंटित हो रहे है। कई छात्र-छात्राओं को 150-200 किमी दूर कालेज दिए है। ऐसे में विद्यार्थी प्रवेश नहीं ले रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि राज्य का प्रवेश प्रतिशत इंदौर की तुलना में अधिक है, जो मध्य प्रदेश का शैक्षिक केंद्र है। राज्य का प्रवेश प्रतिशत जहां 45 प्रतिशत है, वहीं इंदौर का आंकड़ा 42 प्रतिशत है।

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अशासकीय शिक्षा महाविद्यालय संघ के अध्यक्ष अभय पांडे और कविता कासलीवाल का कहना है कि एमएड पाठ्यक्रम की सीटों को देखते हुए विभाग को एक और अतिरिक्त चरण की काउंसलिंग की अनुमति मांगी है। ताकि शत-प्रतिशत सीटों पर प्रवेश हो सके। रवि भदौरिया व अवधेश दवे ने बताया कि संघ ने उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव से संपर्क किया। अगले सप्ताह प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े मुद्दें पर चर्चा की जाएगी।

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