डीआरडीई की लैब ने दुनिया में परचम लहराया, भारत अब विश्व में दूसरे नंबर

 ग्वालियर
 आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना(डीआरडीई ) की लैब ने दुनिया में परचम लहराया है। केमिकल हमलों से बचाव करने वाले रक्षा उत्पादों की तकनीक के गुणवत्तापूर्ण परीक्षण में भारत अब विश्व में दूसरे नंबर पर है। अमेरिका यानि‍ यूएस (यूनाइटेड स्टेट्स) के बाद भारत की डीआरडीई की लैब एशिया की पहली और दुनिया की दूसरी लैब होगी, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों पर खरा पाया गया है।

मप्र के ग्वालियर स्थित डीआरडीई की लैब रक्षा उत्पादों के निर्माण क्षेत्र में काम करती है। इसी लैब को अंतराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान की गई है। इंटरनेशनल इलेक्ट्रोटेक्निकल कमीशन(जो दुनियाभर की लैबोरेटरी को मान्यता प्रदान करती है) ने डीआरडीई को मान्यता प्रदान की है। यह संस्था आइएसओ (इंटरनेशनल आर्गेनाइजेशन फार स्टैंड्राइजेशन) के तहत आती है। यह पूरा कार्य डीआरडीई की वरिष्ठ वैज्ञानिक डा मनीषा साठे के नेतृत्व में हुआ है।

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