नहीं मिला शव वाहन तो शव को बाइक पर 80KM ले गए बेटे

शहडोल

मेडिकल कालेज में शव वाहन की सुविधा नहीं है, जिसके कारण आम गरीबों को परेसानी होती है। इस स्थिति में लोग अपने साधन से ही शव वाहन लेकर जाते हैं।कई लोग मजबूरी में मोटर साइकिल या अन्य साधनों से शव लेकर जाते हैं। रविवार को भी एक ऐसा मामला सामने आया है। मेडिकल कालेज में शव वाहन न मिलने पर स्वजन मोटर साइकिल से 80 किमी दूर मां का शव ले गए।

जानकारी के अनुसार मेडिकल कालेज में शव वाहन एम्बुलेंस की सुविधा नहीं है, जिसके कारण मरीजों को परेशानियों को सामना करना पड़ता है। कालेज प्रबंधन के अनुसार मेडिकल कालेज में एम्बुलेंस की सुविधा वर्तमान में नहीं है और न ही शव वाहन है। दो एम्बुलेंस मिली हैं जिनके पंजीयन की प्रक्रिया की जा रही है।इसके बाद ही मरीजों को सुविधा दी जाएगी।

जानकारी के अनुसार गोडारू निवासी जयमंत्री यादव को सीने में तकलीफ होने के कारण जिला अस्पताल शहडोल में भर्ती कराया था। हालत में सुधार न होने के कारण मेडिकल कालेज के लिए रेफर किया गया। उपचार के दौरान रात उसकी मौत हो गई।इसके बाद शव वाहन नहीं मिला तो मोटर साइकिल में लकड़ी के पटिया के सहारे मोटर साइकिल से घर तक ले गए। मेडिकल कालेज के डीन डा. मिलिंद शिरालकर ने बताया कि गोडारू निवासी जयमंत्री यादव को सीने में तकलीफ होने के कारण जिला अस्पताल शहडोल में भर्ती कराया था।

इसके बाद मेडिकल कालेज लाया गया जहां उपचार के दौरान मृत्यु हो गई है।उन्होंने बताया कि मृतका के स्वजनों से वाहन के लिए पूछा गया था,तो उन्होंने बताया था कि उनके पास सुविधा है वे शव लेकर चले जाएंगे।डीन ने कहा कि सरकारी शव वाहन की सुविधा नहीं है, लेकिन हम अपनी ओर से वैकल्पिक वाहन उपलब्ध करा देते।

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स्वजनों ने वाहन की मांग भी नहीं की और पूछने पर मना कर दिया इसलिए हम वाहन नहीं दिलवा पाए।वहीं मृतका के पुत्र सुंदर यादव ने बताया कि जब वह अपनी मां को बीमारी की हालत में जिला अस्पताल से मेडिकल कालेज लेकर आया था,तब भी एम्बुलेंस नहीं दी गई थी।मेडिकल कालेज में शव वाहन कहां से मिलता जब एम्‍बुलेंस नहीं दिया।इसलिए हम अपनी मां को अपनी सुविधा के अनुसार घर तक ले आए।

 

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