सतना में अवैध क्‍लीनिकों पर 2010 की धारा 41 के अंतर्गत उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से सील करने कार्रवाई की गई

सतना
मरीजों के स्वास्थ्य के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है। इसकी एक बानगी शनिवार को उस वक्त देखने को मिली। जब सिटी एसडीएम व स्वास्थ्य विभाग का अमलें ने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एवं रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के तहत से विपरीत संचालित पांच क्लिीनिक पकड़े। यह कार्रवाई अनुविभागीय दंडाधिकारी रघुराजनगर राहुल सिलाडिया के नेतृत्व में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय अरख, सीएमएचओ कार्यालय के लिपिक आशुतोष प्यासी एवं पुलिस बल की उपस्थिति में की गई।

इस दौरान जिले में अवैध रूप से संचालित पांच क्लीनिकों पर व्यापक एवं संगठित कार्रवाई की गई। यह सभी क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एवं रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के विपरीत संचालित होना पाए गए।सभी प्रतिष्ठानों पर क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010 की धारा 41 के अंतर्गत उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से सील करने कार्रवाई की गई है। अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी प्रकरण पंजीबद्ध किए जाने की कार्रवाई प्रचलन में है। सभी क्लिनिक पर इंजेक्शन का अवैध प्रयोग और लापरवाही पूर्ण डिस्पोजल करना पाया गया।
 
स्थल पर जांच के दौरान न तो कोई वैध चिकित्सकीय डिग्री प्रस्तुत की गई और न ही कोई चिकित्सकीय योग्यता प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। क्लीनिक में एक व्यक्ति जो स्वयं को सफाईकर्मी बता रहा था, वही मरीजों का उपचार एवं दवाओं का वितरण करता पाया गया। मरीजों से ली गई फीस एवं वितरित दवाइयों का रिकॉर्ड बरामद कर जब्त किया गया। क्लीनिक को तत्काल प्रभाव से सील किया गया।

बड़ी संख्या में एलोपैथिक दवाइयाँ बिना किसी विधिवत पंजीकृत चिकित्सक की उपस्थिति में पाई गईं। क्लीनिक का संचालन एक अनधिकृत व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था। क्लीनिक सील कर अग्रिम विधिक कार्यवाही हेतु रिपोर्ट तैयार की गई।

निरीक्षण में पाया गया कि प्रतिष्ठान के पास क्लीनिक रजिस्ट्रेशन नहीं था तथा स्वघोषित डॉक्टर केवल बीएससी और एमए (गैर-चिकित्सा विषय) की डिग्री रखता था। चिकित्सकीय सेवा हेतु वैध योग्यता प्रमाणित नहीं थी। हॉस्पिटल को तत्काल प्रभाव से सील कर आगे विधिक प्रक्रिया शुरू की गई।

एक कथित बंगाली चिकित्सक द्वारा संचालित इस क्लीनिक से भारी मात्रा में इंजेक्शन व अन्य दवाइयाँ बरामद हुईं। दो मरीज भी उपचाररत पाए गए, जिन्हें सरकारी अस्पताल भेजा गया। क्लीनिक बिना पंजीयन पाया गया एवं त्वरित प्रभाव से सील किया गया।

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