(अमिताभ पाण्डेय)
भोपाल । गीत, ग़ज़ल, कव्वाली के शौकीन लोगों के लिए आज की शाम यादगार बन गई। संगीत प्रेमियों को यह मौका जी -20 देशों के सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता का उत्सव मनाने की श्रृंखला के अन्तर्गत मिला। इसी सिलसिले में आकाशवाणी भोपाल द्वारा रविन्द्र भवन में महफ़िल-ए-कव्वाली का आयोजन किया गया । इसमें देश के ख्यातिनाम कव्वाल मुनव्वर मासूम व साथियों एवं सैयद नासिर हुसैन और साथियों ने दर्शकां से भरे रविन्द्र भवन के अंजनी हॉल को झूमने पर मजबूर कर दिया। सबसे पहले सैयद नासिर हुसैन ने अमीर खुसरो का जग प्रसिद्ध कौल तराना ‘‘मन कुन्तो मौला’’ से माहौल को खुशनुमा कर दिया। इसके बाद अमीर खुसरो के ही कलाम ‘‘ए री सखी री’’ और अनवर फरूखाबादी की ग़ज़ल ‘‘मस्त आंखों में काजल’’ प्रस्तुत की।
भोपाल के ही सुप्रसिद्ध शायर मंजर भोपाली की मनकबत ‘‘बिगड़ी को बना दीजिये’’ को श्रोताओं की खूब दाद मिली । तत्पश्चात पूरे विश्व में भोपाल की कव्वाली का नाम रोशन कर रहे मुनव्वर मासूम ने अपनी पहली प्रस्तुति से ही श्रोताओं की तालियां बटोरने का सिलसिला आरम्भ कर दिया। मुनव्वर मासूम ने सबसे पहले हमद ‘‘बिस्मिल्लाह’’ प्रस्तुत की । इसके बाद जैसे ही अमीर खुसरो की सुप्रसिद्ध कव्वाली ‘’छाप तिलक सब’’ के शब्द सभागार में गूंजें पूरा हाल रोमांचित होकर तालियों से मुनव्वर मासूम का साथ देने लगे। महफ़िल को आगे बढ़ाते हुए आपने एक ग़ज़ल ‘‘अपने क़िरदार को इस दर्जा छुपाया ना करो- दिल ना मिल पाए तो फिर हाथ मिलाया ना करो’’ पेश की जिसे श्रोताओं ने बेहद पसन्द किया। कव्वाली की इस खुशनुमा महफिल का समापन मुनव्वर मासूम ने एक कौमी तराने ‘‘मिल गये जब हमारे कदम से कदम’’ से किया। सभी साथी कलाकारां ने बखूबी साथ निभाया।
कार्यक्रम के आरम्भ में कार्यक्रम प्रमुख विश्वास केलकर ने सभी कलाकारों का स्वागत किया और आभार प्रदर्शन केन्द्राध्यक्ष उपमहानिदेशक आकाशवाणी यशवन्त चिवन्डे ने किया। कार्यक्रम का संचालन उद्घोषक डॉ. अरविन्द सोनी ने किया । इस अवसर पर आकाशवाणी भोपाल के कार्यक्रम अधिकारी राजेश भट्ट सहित बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित थे।
इसी श्रृंखला में आगामी शुक्रवार को शाम 6.30 बजे से कवि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें लखनऊ के वेदव्रत वाजपेयी सहित मदनमोहन समर, डॉ. अनु सपन और अशोक नागर सहित अनेक नामी कवि आमंत्रित किये गये है।
