भोपाल
कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्र भविष्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के प्रमुख आधार हैं। वर्तमान डिजिटल युग में डेटा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपदा बन चुका है।इसके संरक्षण और सुरक्षित उपयोग में साइबर सुरक्षा की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सैनिक देश की भौतिक सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ राष्ट्र की डिजिटल सीमाओं के प्रहरी हैं।
मंत्री टेटवाल शुक्रवार को ग्लोबल स्किल पार्क, भोपाल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय साइबर सिक्योरिटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 के दूसरे दिन आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में भोपाल के विभिन्न तकनीकी एवं इंजीनियरिंग संस्थानों के 400 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
मंत्री टेटवाल ने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने, नवाचार को अपनाने, साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने, रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजक बनने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने और तकनीकी रूप से सशक्त मानव संसाधन तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
एमपीएसईडीसी की मुख्य महाप्रबंधक सु शिवांगी जोशी ने कहा कि मध्यप्रदेश को प्रौद्योगिकी एवं नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने में कौशल विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एसएसआरजीएसपी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गिरीश शर्मा ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हुए तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा उद्योगोन्मुख कौशल विकास पर बल दिया।
एसएसआरजीएसपी-गोप के वरिष्ठ निदेशक नीरज सहाय ने ग्लोबल स्किल पार्क को भारत का पहला एकीकृत बहु-कौशल प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र बताते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य वैश्विक मानकों के अनुरूप दक्ष एवं भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करना है।
कार्यक्रम के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में “साइबर डिफेंस फंडामेंटल्स” विषय पर विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांतों, साइबर खतरों तथा सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी दी। प्रतिभागियों को मालवेयर, रैनसमवेयर, फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और इनसाइडर रिस्क जैसे प्रमुख साइबर खतरों से अवगत कराया गया। साथ ही साइबर किल चेन फ्रेमवर्क के माध्यम से साइबर हमलों की प्रक्रिया और उन्हें रोकने के उपायों की जानकारी भी दी गई।
सत्र में ‘डिफेंस इन डेप्थ’ की अवधारणा, सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, साइबर हाइजीन, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट एवं पैचिंग जैसी सुरक्षा प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार एवं करियर अवसरों, विशेष रूप से एसओसी एनालिस्ट जैसी उभरती भूमिकाओं की जानकारी भी विद्यार्थियों के साथ साझा की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान कर डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करना है।
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