संविधान निर्माता होने के साथ नए भारत के निर्माता भी हैं बाबा साहेब : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

डॉ. अम्बेडकर ने संविधान के रूप में हमें दिया लोकतंत्र का सबसे बड़ा ग्रंथ
नारी सशक्तिकरण के साहसी और प्रबल समर्थक थे बाबा साहेब
न्यूनतम मजदूरी, कम्पनी लॉ, महिला श्रमिकों के अधिकार हैं बाबा साहेब की देन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भीम जन्मभूमि (महू) पहुंचकर बाबा साहेब को अर्पित की पुष्पांजलि

महू
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जन्मभूमि पर उनकी जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। बाबा साहेब एक ऐसे युग दृष्टा थे, जिन्होंने एक हजार साल की गुलामी की कठिनाइयों को दूर करने और समाज के अंदर समानता के भाव को विकसित करने के लिए लड़ाई लड़ी थी। बाबा साहेब के योगदान से हम सभी गौरवान्वित होते हैं। हमें उनके बनाए संविधान के अनुसार ही चलना चाहिए। इससे श्रेष्ठ संविधान और कोई नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. अम्बेडकर द्वारा महिला समानता और सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों और उनके योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने बहनों को पिता की संपत्ति में अधिकार दिलाने, तलाक के समय मुआवजा और मातृत्व अवकाश दिलाने के लिए सराहनीय कार्य किया। उन्होंने हमें माताओं-बहनों के लिए 'समान काम-समान वेतन' का दूरदृष्टि पूर्ण विचार दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को इंदौर के डॉ. अम्बेडकर नगर (महू) में डॉ. अम्बेडकर की जन्मभूमि परिसर में आयोजित जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे।

लोकसभा और विधानसभा में सुनिश्चित होगा 33 प्रतिशत आरक्षण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा साहेब महिला सशक्तिकरण के साहसी और प्रबल समर्थक थे। महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए बाबा साहेब ने अपनी कुर्सी तक छोड़ दी थी। न्यूनतम मजदूरी, कंपनी लॉ और महिला श्रमिकों को अधिकार हमें बाबा साहेब की ही देन है। केन्द्र सरकार संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर के आदर्शों पर चलते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए 21वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय लेने जा रही है। आने वाले दिनों में लोकसभा में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पूर्ण रूप से लागू करने पर चर्चा होगी, इससे माताओं-बहनों को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के कल्याण के लिए डॉ. अम्बेडकर ने जो किया, इसके लिए देश उन्हें सदैव स्मरण करता रहेगा। बाबा साहेब ने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण भारत माता की आराधना करते हुए समाज को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया था।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भीम जन्मभूमि पर आज होली-दीवाली जैसा माहौल है। बाबा साहेब के जीवन से जुड़े सभी 5 पड़ावों को हमारी सरकार ने पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया है। जातिगत असमानता को खत्म करने के लिए अंतर्जातीय विवाह करने पर नवदम्पत्तियों को हमारी सरकार प्रोत्साहन राशि के रूप में 2 लाख रुपए दे रही है। अनुसूचित जाति-जनजाति के कल्याण के लिए सरकार ने सालाना बजट का एक तिहाई हिस्सा इन्हें समर्पित किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनिल गजभिये और डॉ. सत्यभान मेश्राम द्वारा डॉ. अम्बेडकर के जीवन पर लिखी पुस्तक 'बाबा साहेब की दृष्टि में सामाजिक न्याय' का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने डॉ. सुदीप भगतदीप, डॉ. संदेश माधवराव, स्व. निशांत कायरे, डॉ. मीना गजभिये सहित 5 समाजेसवियों को 'भीमरत्न अवॉर्ड 2026' से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद सर्वजनों को 'बाबा साहेब अमर रहे' का नारा उद्घोष कराया।

महू विधायक एवं पूर्व मंत्री सुऊषा ठाकुर ने कहा कि आज बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर की जयंती पर हम उनके दिखाए मार्ग पर चलने का प्रयास करें। यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम सब मिलकर संकल्प लें कि जीवन में कभी हिंसा, चोरी, नशा और कोई गलत काम नहीं करेंगे। बाबा साहेब समाज में आमूल-चूल परिवर्तन के लिए कटिबद्ध थे। नारी शक्ति की समानता के उनके विचारों के आधार पर देश की संसद में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के माध्यम से विधानसभा और लोकसभा की 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय होने जा रहा है।

वरिष्ठ विचारक आलोक कुमार ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर बेहद उच्च शिक्षित व्यक्तित्व थे, फिर भी उनके साथ तत्कालीन समाज में भेदभाव हुआ। जब संविधान लिखने की बारी आई, तो महात्मा गांधी जी ने पं. जवाहरलाल नेहरू को सुझाव दिया था कि संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनने के लिए एक ही व्यक्ति योग्य है और वह डॉ. भीमराव अम्बेडकर ही हैं। संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन की जिम्मेदारी डॉ. अम्बेडकर को उनकी योग्यता के कारण ही मिली थी। उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने समाज को बंधुता और भाईचारा दिया। उन्होंने समानता का संकल्प किया था। भारतीय संविधान की धारा 17 में लिखा गया कि अस्पृश्यता (छुआछूत) को समाप्त किया जाता है और समाज के एक बड़े वंचित वर्ग को इस अन्याय से मुक्ति मिली थी। छुआछूत और भेदभाव भारतीय संस्कृति का कभी भी आधार नहीं रहा। हम सभी को भारत के संविधान में उल्लेखित नियमों/उपनियमों का पालन करना चाहिए। सभी को समान मानते हुए देश के विकास के लिए काम करने की आवश्यकता है। समाज के हर वर्ग को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से समृद्ध बनाना है।

कार्यक्रम को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, स्थानीय धम्म संस्था के अध्यक्ष धम्मदीप महाथेरो एवं अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनुयायियों संग सहभोज कर दिया समरसता का संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत रत्न डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर जन्मस्थली स्मारक स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए अनुयायियों के साथ सहभोज कर सामाजिक समरसता का प्रेरक संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर देशभर से पधारे श्रद्धालुओं के साथ पंक्तिबद्ध बैठकर सह भोज किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर का जीवन हमें समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंबेडकर जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करने का अवसर है। इस प्रकार का सहभोज समाज में भेदभाव मिटाने और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम है। हमें बाबा साहब अम्बेड़कर के सामाजिक समरसता के संदेश को जीवन में आत्मसात करना चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अनुयायी उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर बाबा साहब के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

बाबा साहेब के स्मारक पहुँचकर श्रद्धा सुमन अर्पित किये

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर डॉ. अंबेडकर नगर (महू) स्थित बाबा साहब अंबेडकर की जन्मस्थली पर बने भव्य स्मारक पहुँचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी और स्मारक का अवलोकन भी किया। उन्होंने यहां स्थित बाबा साहब के अस्थि कलश के दर्शन किए और श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने भंते धर्मशील की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण किया। डॉ. अम्बेडकर नगर महू में राज्य शासन ने मेजबान बनकर श्रद्धालुओं की आवभगत मेहमानों की तरह की। श्रद्धालुओं और भंतों के रूकने की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं को नि:शुल्क भोजन और शीतल जल की पर्याप्त व्यवस्था की गई।

 

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