राजनांदगांव स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय सेना प्रमुख फील्ड मार्शल केएम करियप्पा 15 जनवरी 1949 को बने। वैसे तो भारतीय सेना की स्थापना एक अप्रैल 1895 को हुई थी। यह दिन भारत के गौरव को बढ़ाने और सीमा की सुरक्षा करने वाले जवानों के सम्मान का होता है। एक ऐसी भारतीय सेना के सैनिक हमारे शहर के 79 वर्षीय सरदार भगवान सिंग जो 1971 के युद्ध में शामिल हुए।
उनसे दैनिक भास्कर ने थल सेना दिवस पर चर्चा की। सैनिक भागवत सिंग भारतीय सेना के फोर सिख रेजीमेंट के सिपाही हैं, ये रेजीमेंट सेना द्वारा लड़ी गई सभी युद्ध में शामिल हुए और जीत हासिल की। सिपाही सिंग ने कहा कि सैनिक होने का गर्व है, एक दिन तो सभी को मरना है। जब मर ही जाना है तो देश के दुश्मनों को मारकर मरें ज्यादा अच्छा है। युद्ध लड़ना है, मारना है, मरना है। वैसे भी हमारे धर्म में देश की रक्षा सर्वोपरि है।
इस रेजीमेंट के ही सबसे ज्यादा सैनिक देश की सुरक्षा, शांति व्यवस्थाओं के लिए प्राणों की आहुति दी। वहीं वीरता के लिए सबसे ज्यादा सैनिक को दिए जाने वाल मेडल भी हासिल किया। उन्होंने बताया कि इस रेजीमेंट के सिपाहियों पर एक फिल्म बनी केसरी जो सबसे ज्यादा प्रचलित हुई। सिपाही भगवान सिंग ने बताया कि 20 साल की उम्र में छह दिसंबर 1965 को भारतीय सेना में शामिल हुए। उसके बाद 15 वर्ष तक सेवा दी। इस दौरान 1971 की लड़ाई में शामिल हुए।
हम जिस जगह में तैनात थे वहां आदेश आया कि आपके ग्रुप को रवाना है। आदेश के बाद हमें पहले दिन बंगलादेश में घुसे तो सुबह से लेकर शाम तक इंतजार करते रहे, मगर कोई भी दुश्मन नहीं मिला। फिर शाम को खबर लगी कि दुश्मन आ गए लेकिन नहीं मिले। ऐसा करते सुबह हो गई। हमें आगे बढ़ाने का आदेश आया। जैसे ही थोड़ा आगे बढ़े गन्ने के खेत से कुछ व्यक्तियों की मूवमेंट हुई जो हमें खोज रहे थे, कि भारतीय सेना के जवान आए हैं तो कहां हैं। हम आवाज दिए वो भी पीछे हटे और हम भी अपनी पोजिशन लिए।
दुश्मन जैसी हरकत करेगा तो उसका जवाब देना सरदार भगवान सिंग ने बताया कि उस दौरान हमने अपने अधिकारी को बताए कि कुछ व्यक्तियों की मूवमेंट हुई तो हमारे साहब ने हमें डांटा कि यहां बताने की कोई जरूरत नहीं है, हमारा काम मरना और मारना है। जाओ उसी जगह पर। मुझे जिम्मेदारी देते हुए जैसे भी हो हैंडल करो और मुझे बड़ा हथियार दिए। मैं अपनी जगह पर पहुंचा ही था कि देखा एक सीध में 60 दुश्मन सैनिक हमारी ओर बढ़ रहे, जिसमें 40 एक तरफ और 20 एक तरफ। मैंने फिर अधिकारी को सूचित किया, उन्होंने कहा कि आप अपनी जगह में रहो दुश्मन जैसे हरकत करेगा उसका जवाब देना।








