छत्तीसगढ़

CG : कृषि क्रांति की ओर बढ़ता जशपुर : किसानों ने रायपुर में किया अध्ययन भ्रमण

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से आय बढ़ाने के नए अवसरों की मिली जानकारी

औषधीय एवं सुगंधित फसलों की वैज्ञानिक खेती और बाजार से जुड़ाव पर जोर

रायपुर,

कृषि क्रांति अभियान

जशपुर जिला प्रशासन द्वारा “आत्मा योजना” एवं “कृषि क्रांति अभियान” के तहत किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती की दिशा में प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में चयनित किसानों को रायपुर स्थित सेमीना एग्रो कंपनी में अध्ययन भ्रमण के लिए भेजा गया।

इस भ्रमण का उद्देश्य किसानों को उच्च मूल्य वाली औषधीय एवं सुगंधित फसलों की वैज्ञानिक खेती से अवगत कराना और उन्हें कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के दौरान कंपनी के विशेषज्ञों ने मोरिंगा, पपीता, लेमनग्रास, पिपरमिंट, पचौली, अश्वगंधा, तुलसी और रोसेला जैसी फसलों की उन्नत तकनीक, लागत-लाभ विश्लेषण और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया गया कि इन फसलों की मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है।

उप संचालक कृषि जशपुर ने बताया कि किसानों को विशेष रूप से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग मॉडल के बारे में समझाया गया, जिसमें कंपनियां पूर्व निर्धारित दर पर फसल की खरीद (बायबैक) करती हैं। इससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से राहत मिलती है और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित होता है।

उन्होंने बताया कि इस पहल को आगामी खरीफ/मानसून सत्र 2026-27 की कार्ययोजना से जोड़ा गया है, जिसके तहत जिले में क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। लेमनग्रास, पाल्मारोसा, पचौली, यूकेलिप्टस सिट्रियोडोरा, हल्दी, अदरक, तुलसी, सतावर और सर्पगंधा जैसी फसलों को प्राथमिकता दी जाएगी।

विकासखंड स्तर पर इच्छुक किसानों का चयन कर उनकी सहमति से जानकारी संकलित की जा रही है, ताकि उन्हें प्रशिक्षण, फील्ड विजिट और कंपनियों के साथ अनुबंधित खेती से जोड़ा जा सके। इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से अनुबंध और मूल्य संवर्धन गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

कृषि क्रांति अभियान के तहत यह पहल किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर व्यावसायिक और निर्यातोन्मुख कृषि की ओर प्रेरित कर रही है। इससे जिले में नवाचार को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय में स्थायी वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम जारी रहेंगे, ताकि किसान आधुनिक तकनीकों और बाजार के अवसरों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।

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