बिलासपुर। जेलों में बढ़ती भीड़, सुविधाओं की कमी और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने डीजी जेल से शपथ पत्र मांगा था। डीजी जेल ने इसके जवाब में एक भारी भरकम दस्तावेज प्रस्तुत किया, जिस पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि डीजी जेल को नए शपथ पत्र के साथ यह बताना होगा कि पिछले सुधारों के मुकाबले अब तक क्या प्रगति हुई है। अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।
दरअसल, वर्ष 2013 में शिवराज सिंह ने एडवोकेट सुनील पिल्लई के माध्यम से जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों की समस्या और सुविधाओं की कमी को लेकर एक जनहित याचिका दायर की थी। इसके बाद, 2017 में कैदियों के स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी हाई कोर्ट ने भी संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। इस मुद्दे पर हाई कोर्ट के 27 अगस्त और 25 सितंबर को दिए गए निर्देशों के पालन में डीजी जेल ने मंगलवार को शपथ पत्र प्रस्तुत किया।
हाईकोर्ट ने शपथ पत्र की समीक्षा के बाद पाया कि इसमें राज्य की केंद्रीय जेलों, जिला जेलों और उप जेलों का एक बड़ा रिकॉर्ड शामिल किया गया है, लेकिन इन दस्तावेजों में सुधारात्मक जानकारी का अभाव है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह शपथ पत्र मात्र औपचारिकता लग रहा है और संभवत: डीजी जेल ने दस्तावेज को पढ़े बिना ही इसे प्रस्तुत कर दिया है।
चीफ जस्टिस ने स्पष्ट निर्देश दिए कि डीजी जेल अपने दस्तावेजों का पुन: अवलोकन कर एक संक्षिप्त और स्पष्ट शपथ पत्र पेश करें, जिसमें सुधारों और प्रगति का तुलनात्मक विवरण दिया गया हो।
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