CG : बाहरी लोगों को काम पर रख स्थानीय युवाओं का हक छीन रहा पिकाडिली शराब फैक्ट्री : विनोद चंद्राकर …
महासमुंद । पूर्व संसदीय सचिव छग शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने पिकाडिली शराब फैक्ट्री में स्थानीय युवाओं को रोजगार न देकर बाहरी लोगों को काम पर रखे जाने के निर्णय को स्थानीय युवाओं के साथ धोखा बताया है। उन्होंने कहा कि अछोली (बेलटुकरी) स्थित पिकाडली शराब फैक्ट्री प्रबंधन की मनमानी से पूरे क्षेत्र में आक्रोश है। जिस जमीन पर यह फैक्ट्री खड़ी है उसी क्षेत्र के बेरोजगार युवा आज रोजगार के लिए भटक रहे हैं जबकि कंपनी प्रबंधन ने स्थानीय लोगों की अनदेखी कर उत्तर प्रदेश और बिहार से भारी संख्या में मजदूरों को काम पर रख लिया है। यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है और क्षेत्र के युवाओं के अधिकारों पर सीधा हमला है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ की उद्योग नीति साफ कहती है कि राज्य में स्थापित होने वाले उद्योगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। नीति का मकसद यही है कि उद्योग से आसपास के लोगों की आजीविका चले और पलायन रुके। लेकिन पिकाडली प्रबंधन ने उद्योग नीति को दरकिनार कर दिया है। जिस हक पर स्थानीय युवाओं का दावा था वह यूपी और बिहार के लोगों को दे दिया गया। यह नीति का उल्लंघन है और औद्योगिक क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय है। इस मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि कंपनी के एक अधिकारी ने अहंकार में आकर कहा कि यह सरकार की शराब कंपनी है, हम जिसे चाहेंगे रखेंगे। जबकि सच्चाई यह है कि यह सरकार की कंपनी नहीं है बल्कि एक निजी शराब फैक्ट्री है। जिसे स्थानीय क्षेत्र वासियों को धोखे में रखकर देसी शराब बनाने की अनुमति दी गई है।उक्त अधिकारी का बयान तथ्यों से परे और जनता को गुमराह करने वाला है। निजी प्रबंधन सरकार के नाम पर धमकाने की कोशिश कर रहा है जो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार के नाम पर निजी कंपनी की मनमानी चलाना तानाशाही है।
पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि इसके साथ ही क्षेत्र की जनता के साथ एक और बड़ा धोखा हुआ है। फैक्ट्री की स्थापना के समय कहा गया था कि यहां डिस्टलरी और बियर का उत्पादन होगा। स्थानीय लोगों को बताया गया था कि उद्योग से क्षेत्र का विकास होगा और प्रदूषण भी नियंत्रित रहेगा। लेकिन बाद में प्रबंधन ने चुपचाप यहां से देशी शराब का उत्पादन शुरू कर दिया। जनता को अंधेरे में रखकर उत्पादन बदल देना विश्वासघात है। जिस बात की अनुमति और सहमति लेकर जमीन ली गई थी उससे अलग काम किया जा रहा है। इससे सामाजिक माहौल पर भी असर पड़ रहा है और क्षेत्र के लोगों में गहरी नाराजगी है। इस पूरे मामले की जांच कराई जाए। पहला, फैक्ट्री में कुल रोजगार का कम से कम अस्सी प्रतिशत हिस्सा स्थानीय युवाओं के लिए आरक्षित किया जाए और बाहरी भर्ती पर तुरंत रोक लगे। दूसरा, प्रबंधन सार्वजनिक करे कि वर्तमान में कितने स्थानीय और कितने बाहरी लोग काम कर रहे हैं। तीसरा, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के साथ बैठक की जाए। चौथा, अधिकारी श्री शुक्ला के झूठे बयान पर कंपनी सार्वजनिक माफी मांगे। पांचवां, फैक्ट्री को जिस उत्पादन की अनुमति मिली थी उसकी जांच हो और यदि डिस्टलरी या बियर की जगह नियम विरुद्ध देशी शराब बनाई जा रही है तो कड़ी कार्रवाई की जाए। उद्योग नीति जनता के हित के लिए है, प्रबंधन की मनमानी के लिए नहीं। रोजगार युवाओं का अधिकार है। निजी शराब फैक्ट्री को सरकार की कंपनी बताकर डराना और उत्पादन की जानकारी छिपाकर देशी शराब बनाना दोनों ही क्षेत्र की जनता के साथ धोखा है।
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