छत्तीसगढ़

CG :बिना मान्यता के राजधानी में चल रहा स्कूल, फीस के नाम पर पालकों से वसूल रहे अच्छी-खासी रकम…

रायपुर यह अंदाजा मुश्किल है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में है, या फिर उन्हें चढ़ावा चढ़ाया जा रहा है. यह बात इसलिए उठ रही है क्योंकि राजधानी रायपुर में एक नहीं बल्कि दो-दो स्कूल बगैर मान्यता के संचालित हो रहे हैं. बीते सालभर से बगैर मान्यता के संचालित चैतन्य टेक्नो स्कूल में करीबन हजार छात्र अध्ययनरत हैं, जिनके भविष्य पर सवालिया निशान है. मिली जानकारी के मुताबिक़, राजधानी सहित पांच अलग-अलग ज़िलों में ये स्कूल संचालित हैं. यही नहीं राजधानी में नए सत्र से चैतन्य टेक्नो स्कूल खोलने की तैयारी है. जबकि जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि इस नाम से किसी भी स्कूल को मान्यता नहीं दी गई है.बात करें चैतन्य टेक्नो स्कूल का फ़ीस की तो कक्षा चौथी में प्रवेश लेने वाले छात्र से ट्यूशन फ़ीस के नाम से 55 हज़ार रुपए लिया जाता है, वहीं एक सेमेस्टर (6 माह) के लिए पुस्तक मटेरियल 6555 रुपए में दिया जाता है. यूनिफार्म का रेट साइज़ के अनुसार लिया जाता है. वहीं कक्षा 6 की बात करें तो 60 हजार रुपए ट्यूशन फ़ीस और एक सेमेस्टर की पुस्तक के लिए 6545 रुपए चार्ज किया जाता है.

कक्षा नौवीं में 75 हज़ार ट्यूशन फ़ीस लिया जा रहा है. वहीं बुक मटेरियल के नाम पर 7910 रुपया एक सेमेस्टर के लिए लिया जा रहा है. इस तरह एक साल में पुस्तक का ही लगभग 16,000 रुपए लिया जा रहा है. इसके साथ ही ऑनलाइन क्लासेस के लिए रजिस्ट्रेशन फ़ीस छह हज़ार रुपया है. किराये के भवन में संचालित श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल किराये के भवन में संचालित हो रहा है. एक-एक करके ब्रांच बढ़ाया जा रहा है. नए शिक्षा सत्र से दसवीं कक्षा में प्रवेश के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया है. चौंकाने वाली बात ये है कि सालभर से स्कूल संचालित और शिक्षा विभाग मौन है. इससे सवाल उठाया जा रहा है कि क्या शिक्षा विभाग को चढ़ावा चढ़ाया जा रहा है, जिसकी वजह से 1 हज़ार बच्चों के भविष्य सिर्फ़ राजधानी में ही दांव पर लगाया गया है. कैसे हुआ फीस का निर्धारण वहीं स्कूल शुल्क का अनुमोदन वहां की व्यवस्था के आधार पर किया जाता है, और बिना मान्यता वाले स्कूल की फ़ीस कैसे अनुमोदित हो सकती है. समिति द्वारा फ़ीस निर्धारण किया जाता है. कलेक्टर की समिति जाँच करके फ़ीस को अनुमोदित किया जाता है, जो नहीं हुआ है. पुराने मामले ही नहीं सुलझे अब तक बता दें कि इससे पहले प्रदेश भर में संचालित होने वाले दो स्कूल अपनी बोरिया बिस्तर लेकर अचानक शिक्षा सत्र के बीच में नौ-दो-ग्यारह हो चुके हैं, जिससे हज़ारों बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया. मामला को सुलझाने के लिए अधिकारियों ने आनन-फ़ानन में बच्चों की व्यवस्था की. शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत पढ़ाई कर रहे 25% छात्रों को स्थानांतरित किया गया, वहीं 75% बच्चे अब भी भटकने को मजबूर हैं. शिक्षा विभाग जारी करेगा नोटिस जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती ने कहा कि चैतन्य टेक्नो स्कूल का परीक्षण किया गया है, लेकिन अभी तक कि उनकी उनको मान्यता नहीं दी गई है. नोटिस जारी करके पूछा जाएगा बग़ैर मान्यता कैसे स्कूल संचालित किया जा रहा है. मार्कशीट कैसे जारी करेंगे, ये तो स्कूल वाले ही जाने और पालक जो भर्ती कराए हैं. मैं पालकों से अपील करता हूँ कि बच्चों को मान्यता प्राप्त स्कूल में ही पढ़ाए. बैठक के नाम पर प्राचार्य ने काटी कन्नी स्कूल की प्राचार्य पूजा से स्कूल की मान्यता से लेकर फीस संरचना पर चर्चा के लिए हमने संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन हमने जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन स्कूल के कर्मचारियों ने प्राचार्य के मीटिंग में होने का हवाला देते हुए मुलाकात कराने से इंकार कर दिया. जाहिर है जब बताने के लिए कुछ न हो तो कोई न कोई बहाना बनाना पड़ता है.
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