इंटेकवेल, डब्ल्यूटीपी, प्रयोगशाला व ग्राम स्तरीय परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा, हर घर तक सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश
एमसीबी / जिले के विकासखंड मनेन्द्रगढ़ में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अंतर्गत संचालित ‘जल जीवन मिशन’ के कार्यों का अधिकारियों द्वारा विस्तृत एवं सघन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान चैनपुर स्थित इंटेकवेल, जल शोधन संयंत्र (WTP), गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला तथा डिवीजन कार्यालय भवन सहित चिरमिरी क्षेत्र के डब्ल्यूटीपी का अवलोकन किया गया। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत सेंधा, लोहारी एवं हर्रा अंतर्गत ग्राम सेंधा, नवापारा एवं हर्रापारा में प्रगतिरत पेयजल परियोजनाओं की जमीनी स्थिति का भी निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माणाधीन संरचनाओं की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के अनुपालन तथा कार्यों की प्रगति का गहन परीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं तथा किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता न किया जाए। इसके साथ ही एलएआई एमवीएस (मल्टी विलेज स्कीम) अंतर्गत शामिल ग्रामों के ठेकेदारों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें कार्यों की प्रगति, चुनौतियों एवं समाधान के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक घर को नियमित रूप से स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके।
निरीक्षण दल में अधीक्षण अभियंता एस. एन. पांडे, कार्यपालन अभियंता आकाश पोद्दार, उप अभियंता मनमोहन सिंह, जिला परियोजना समन्वयक (मॉनिटरिंग) अनिमेष कुमार तिवारी एवं आईईसी प्रभारी नवीन कुमार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने निर्देशित किया कि पेयजल आपूर्ति से जुड़ी सभी संरचनाओं में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए तथा कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विभागीय समन्वय को मजबूत करने पर भी बल दिया गया।
उन्होंने कहा कि ‘जल जीवन मिशन’ केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य स्तर में सुधार होगा और जल जनित बीमारियों पर नियंत्रण संभव हो सकेगा।
