छत्तीसगढ़

CG : विशेष लेख : जशपुर का काजू बना किसानों की समृद्धि की नई पहचान

स्वाद, गुणवत्ता और बढ़ती मांग ने बदली हजारों किसानों की तकदीर

7800 किसान जुड़े काजू उत्पादन से, देश के कई राज्यों तक पहुंच रही जशपुर की मिठास

  •   सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक
  •  नूतन सिदार, सहायक संचालक

रायपुर,

 विशेष लेख : जशपुर का काजू बना किसानों की समृद्धि की नई पहचान
 विशेष लेख : जशपुर का काजू बना किसानों की समृद्धि की नई पहचान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिला खेती और बागवानी के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। पारंपरिक खेती के साथ अब किसान नगदी एवं फल फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सेब, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी और काजू जैसी फसलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही हैं। इनमें काजू उत्पादन किसानों के लिए आय का मजबूत और भरोसेमंद साधन बनकर उभरा है।

 विशेष लेख : जशपुर का काजू बना किसानों की समृद्धि की नई पहचान

काजू की खेती से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

जिला प्रशासन, उद्यान विभाग, रीड्स और नाबार्ड के संयुक्त प्रयासों से जिले में काजू उत्पादन का दायरा तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में जिले के लगभग 7800 किसान करीब 7800 एकड़ भूमि पर काजू की खेती कर रहे हैं। अधिकांश किसान अपने एक-एक एकड़ खेत में काजू की खेती कर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं।
काजू उत्पादन ने न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाई है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी पैदा किए हैं।

 विशेष लेख : जशपुर का काजू बना किसानों की समृद्धि की नई पहचान
 विशेष लेख : जशपुर का काजू बना किसानों की समृद्धि की नई पहचान

जशपुर काजू की देशभर में बढ़ रही मांग

जशपुर में उत्पादित काजू अपनी मिठास, गुणवत्ता और बेहतरीन स्वाद के कारण खास पहचान बना चुका है। यही वजह है कि इसकी मांग छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के साथ-साथ झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में लगातार बढ़ रही है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच जशपुर काजू की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। गुणवत्ता के मामले में जशपुर का काजू बाजार में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

 विशेष लेख : जशपुर का काजू बना किसानों की समृद्धि की नई पहचान

लाभदायक नगदी फसल के रूप में उभरा काजू

काजू किसानों के लिए एक अत्यंत लाभदायक नगदी फसल साबित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ग्राफ्टेड पौधों से जल्दी फल प्राप्त होते हैं और उत्पादन भी अधिक मिलता है।

रोपण के लिए अनुकूल समय और विधि

  •  वर्षा ऋतु में पौध रोपण सबसे उपयुक्त माना जाता है।
  •   पौधों के बीच लगभग 7 से 8 मीटर की दूरी रखी जाती है।
  •  गड्ढों में गोबर खाद और मिट्टी मिलाकर पौधे लगाए जाते हैं।

बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक देखभाल

  •  शुरुआती वर्षों में नियमित सिंचाई जरूरी होती है।
  •  खरपतवार नियंत्रण और समय-समय पर छंटाई से उत्पादन बेहतर होता है।
  •  पौधे 3 से 4 वर्ष बाद फल देना शुरू करते हैं।
  •  8 से 10 वर्षों में पूर्ण उत्पादन प्राप्त होता है।

एक विकसित पेड़ से औसतन 8 से 15 किलोग्राम तक काजू प्राप्त किया जा सकता है।

काजू से मिल रहे अनेक आर्थिक लाभ

काजू का उपयोग मिठाई, नमकीन और ड्राई फ्रूट के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसके साथ ही काजू के छिलकों से औद्योगिक तेल भी तैयार किया जाता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है। काजू के व्यापार और निर्यात से किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।

बागवानी के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा जशपुर

जशपुर में काजू उत्पादन की यह सफलता किसानों की मेहनत, आधुनिक खेती तकनीकों और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है। जिले में फल एवं नगदी फसलों की बढ़ती खेती अब किसानों के जीवन में समृद्धि ला रही है और जशपुर को कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।

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