कोरबा । भारत सरकार, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशों के परिपालन में जिले में आगामी खरीफ मौसम के मद्देनज़र फसलों के अनुसार वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुरूप उर्वरकों की सही मात्रा एवं संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु विशेष जन-जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। इस संबंध में कृषि विभाग के मैदानी अमले को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
अभियान के तहत किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग एवं वैज्ञानिक सलाह के अनुसार एन.पी.के., कॉम्प्लेक्स तथा एस.एस.पी. जैसे उर्वरकों के उचित उपयोग के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही यूरिया एवं डी.ए.पी. के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ता है, जिससे दीर्घकाल में मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन दुष्प्रभावों के प्रति किसानों को जागरूक करने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
जिले के समस्त सहकारी समितियों में उर्वरकों के संतुलित एवं अनुशंसित मात्रा में उपयोग के संबंध में पोस्टर एवं बैनर के माध्यम से जन-जागरूकता फैलाई जा रही है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे यूरिया एवं डी.ए.पी. के अंधाधुंध उपयोग के बजाय मिट्टी परीक्षण, फसल की आवश्यकता एवं वैज्ञानिक सुझावों के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करें।
विशेष रूप से चावल आधारित फसल प्रणाली में मिट्टी में फास्फोरस के संचयन को ध्यान में रखते हुए यह सलाह दी जा रही है कि यदि पूर्ववर्ती फसलों में फास्फोरस का उपयोग किया गया हो, तो वर्तमान फसल में इसके उपयोग से बचें। इससे किसानों की लागत में कमी आएगी तथा मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होगा। साथ ही फास्फोरस सॉल्युबलाइजिंग बैक्टीरिया (पी.एस.बी.) के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे मिट्टी में उपलब्ध फास्फोरस को पौधों के लिए उपयोगी बनाया जा सके।
किसानों को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के अंतर्गत संतुलित उर्वरक उपयोग, एन.पी.के. कॉम्प्लेक्स, एस.एस.पी. एवं जैव उर्वरकों के सही उपयोग के बारे में शिक्षित करने के लिए ग्राम स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही जैविक खाद, नील-हरित शैवाल एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अभियान के माध्यम से किसानों को यूरिया एवं डी.ए.पी. के अत्यधिक उपयोग के दुष्प्रभावों तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के लाभों के बारे में जानकारी मिलेगी। इसके साथ ही मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देते हुए किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (सॉइल हेल्थ कार्ड) के अनुसार उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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