CG : 1 हजार की आर्टिफिशियल मंगलसूत्र बांटी गई थी, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में कोई अनियमितता नहीं : विभाग …
एमसीबी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर प्रसारित एक वीडियो में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को प्रदान की गई उपहार सामग्री, विशेष रूप से मंगलसूत्र, की गुणवत्ता को लेकर भ्रामक एवं तथ्यहीन दावे किए जा रहे हैं। उक्त वीडियो “अविनाश विश्वकर्मा“ नामक अकाउंट से “नारद वाणी“ के लिए प्रकाशित किया गया है, जिसमें कुछ महिलाओं द्वारा यह दावा किया गया है कि उन्हें मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 10 फरवरी 2026 को चनवारीडांड, खड़गवां (जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में प्रदान किया गया मंगलसूत्र “गिलेट“ का था तथा इसकी सामग्री के विरुद्ध 15 हजार रुपये भुगतान किए जाने का भी दावा किया गया है।
इस संबंध में वस्तुस्थिति निम्नानुसार हैः- 10 फरवरी 2026 को खड़गवां विकासखंड के चनवारीडांड में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत कुल 184 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रति कन्या 50,000 रुपये की स्वीकृत राशि के अनुसार लाभ प्रदान किया गया। योजनांतर्गत प्रत्येक कन्या के बैंक खाते में 35,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि आरटीजीएस के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की गई। शेष 15,000 रुपये की राशि से सामूहिक विवाह आयोजन की व्यवस्थाएं एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिसमें भवन किराया, भोजन एवं नाश्ता, टेंट, बैठक व्यवस्था, परिवहन, प्रमाण-पत्र तथा वर-वधु हेतु वस्त्र, जूते-चप्पल, चुनरी, साफा, मंगलसूत्र एवं अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल थी।
यह उल्लेखनीय है कि महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के पत्र क्रमांक एफ-3-41/2012/मबावि/50 दिनांक 14 जनवरी 2013 के बिंदु 2.1 के अनुसार मंगलसूत्र में चांदी का होना अनिवार्य नहीं है। इसी कारण उपलब्ध वित्तीय सीमा एवं बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए योजना के अंतर्गत कृत्रिम (आर्टिफिशियल) मंगलसूत्र क्रय कर हितग्राहियों को प्रदान किया गया था। बाद में प्रदायित मंगलसूत्रों की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित फर्म के भुगतान से प्रति मंगलसूत्र 1,000 रुपये की कटौती की गई तथा यह राशि सीधे संबंधित वधुओं के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी गई। परिणामस्वरूप प्रत्येक पात्र कन्या को कुल 36,000 रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्राप्त हुई, जबकि शेष राशि विवाह आयोजन एवं आवश्यक सामग्री पर नियमानुसार व्यय की गई।
अतः यह स्पष्ट किया जाता है कि 10 फरवरी 2026 को आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में किसी प्रकार की वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितता नहीं की गई। संपूर्ण आयोजन शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों, वित्तीय प्रावधानों एवं भंडार क्रय नियमों का पालन करते हुए संपन्न कराया गया। जनसामान्य से अपील है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक एवं अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें तथा किसी भी सूचना की सत्यता संबंधित विभाग अथवा जिला प्रशासन से प्राप्त करें।
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