राज्य सरकार के बजट में अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण की मांग पर मिली निराशा- पी.डी.खैरवार

 मंडला

         जग जाहिर है, मध्यप्रदेश सरकार लाखों  करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज में फंसी हुई है।तब इस वित्तीय वर्ष के लिए 3,65,607 करोड़ का बजट पेश कर प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने स्पष्ट कर दिया है,कि कर्ज में डूबे प्रदेश का संचालन अब और कर्ज लेकर ही किया जा सकेगा।फिर दशकों से चली आ रही अतिथि शिक्षक व्यवस्था जैसे दर्जनों वर्गों के लाखों सरकारी पर अस्थाई कर्मियों की रोजी रोटी पर से संकट कैसे दूर करेगी सरकार। चुनाव के पूर्व किये गये वादों को पूरा करने इनके अनिश्चित रोजगार से अनिश्चितता को दूर कर निश्चित और नियमित रोजगार कैसे दे पायेगी सरकार।जबकि इस बार मध्यप्रदेश में सत्ता पलटने से बचाने वोटबैंक बढ़ाने के उद्देश्य से विधानसभा चुनाव के पहले प्रायः सभी वर्गों के साथ खुली बातचीत कर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी से वादा किया था,कि उनकी पार्टी की सरकार आने पर सभी वर्गों के रोजगार से अनिश्चितता खत्म करने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार करेगी।बजट आते तक इन सभी वर्गों को भारी इंतजार था पर जैसे ही बजट पेश किया गया सभी के परिवारों के भी रोजी-रोटी मात्र के सपने  चूर चूर हो गए।
           इधर जीएसटी के बाद भी केंद्र सरकार राज्यों को उनका हिस्सा देने को तैयार नहीं है,और डॉक्टर मोहन यादव सरकार में उतना साहस भी है नहीं कि वह प्रदेश के वाजिब हक की मांग केंद्र से कर सके।
          अतिथि शिक्षक परिवार जिला अध्यक्ष पी.डी.खैरवार ने उक्त बयान जारी करते हुए बताया है,कि विगत दिवस विधानसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण ने भाजपा सरकार के विकास के दावे की पोल भी खोल दी है।प्रति व्यक्ति आय में मामूली सी वृद्धि हुई है।जबकि कर्ज का बोझ अनियंत्रित बढ़ता ही जा रहा है। बता दें,कि विधानसभा चुनाव के पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा जो सरकारी कोष से करोड़ों का खर्च कर भोपाल लालपरेड मैदान में 2 सितंबर 2023 को अतिथि शिक्षकों की महापंचायत बुलाई गई थी। जिसमें पहुंचे लगभग दस से पंद्रह हजार अतिथि शिक्षकों के अलावा बड़े-बड़े मीडिया,विभागीय अधिकारियों और मंत्रियों के सामने अतिथि शिक्षकों के लिए घोषणा की गई थी।घोषणा में स्पष्ट था,कि अतिथि शिक्षकों का कार्यकाल सालाना अनुबंधित होगा। रोजगार नियमित चलता रहेगा।शिक्षा गारंटी गुरुजियों की तरह पात्रता परीक्षा लेकर रोजगार नियमित किया जाएगा।शिक्षक भर्ती में पचास फीसदी स्थान अतिथि शिक्षकों के लिए आरक्षित किया जाएगा।दो अंक सत्रवार अधिकतम पांच सत्रों के बीस अंक बोनस के दिए जाएंगे। मानदेय दोगुना किया जाएगा।खैर मानदेय दोगुना तो चुनाव के पहले से ही दिये जाने लगा था। इन बिंदुओं पर की गई घोषणा का एक भी बिंदु इस बजट में सम्मिलित नहीं किया गया है। अतिथि शिक्षकों के सुनिश्चित रोजगार को देखते हुए इनके लिए भी जारी बजट पिछले वर्षों की तुलना में कम है। इसी तरह अन्य वर्गों के हित में भी सबकी अलग-अलग महापंचायत बुलाकर घोषणाएं की गईं थीं।     

     और भी अधिक चिंता जनक है,कि प्रदेश में रजिस्टर्ड बेरोजगारों की संख्या 40 लाख के आसपास पहुंच गई है।इनके सबके रोजगार की भी बात स्पष्ट नहीं की गई है।उधर सीएम राइज और पीएम स्कूलों के खोल दिए जाने के बाद भी प्रदेश में छात्रों का स्कूलों से ड्रॉप आउट होना बढ़ता सा जा रहा है। सरकार ना तो शिक्षा को लेकर उतनी चिंतित है,और ना ही अतिथि शिक्षक के माध्यम से उसे खाली पद भरकर बेरोजगारों को रोजगार देने की चिंता में है। इस बजट में संविदा कर्मचारी,आउटसोर्स कर्मियों,एम डी एम रसोइयों,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं,आशा कार्यकर्ता-ऊषा कार्यकर्ताओं एवं एमडीएम से जुड़े लाखों समूह संगठन कर्मचारियों की मांगों पर भी खामोशी दिखाई दे रही है।
न्यूनतम वेतन भी पहली बार इस सरकार ने घटाया है। किसानों को 2700 रुपए गेहूं का समर्थन मूल्य देने और लाड़ली बहनों को 3000 देने की घोषणा पर भी सरकार ने चुप्पी साध ली है। लाड़ली बहनों और किसान सम्मान निधि के पात्रों की संख्या भी कम करने की जुगत में सरकार दिखाई दे रही है।
 प्रथमदृष्टया यह जनहितकारी नहीं जन विरोधी बजट दिखाई दे रहा है।जो कृषि संकट, बेरोजगारी तो बढ़ाएगा ही साथ ही आर्थिक संकट भी उत्पन्न करेगा, जिससे आगामी समय में आम उपभोक्ताओं के साथ- साथ अतिथि शिक्षकों को भी बेगारों की तरह अपने परिवार के लालन पालन में कई आर्थिक समस्याओं का सामना करने तैयार रहना पड़ेगा।
     इस बजट को देखकर आगामी पखवाड़े में केंद्र सरकार के आने वाले बजट में भी अपेक्षाएं हैं,कि प्रदेश सरकार ने जहां पर अपना ध्यान केंद्रित करना भूल गई है, वहां पर विशेष ध्यान देकर केंद्रीय बजट को जनकल्याणकारी बनाने का काम केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अवश्य करेगी।
भवदीय
पी.डी.खैरवार
जिला अध्यक्ष अतिथि शिक्षक परिवार मंडला एवं
संस्थापक
अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्यप्रदेश।

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