ग्वालियर
हमारे देश के युवा जहां पाश्चात्य संस्कृति को अपना रहे हैं, वहीं पश्चिम के युवा भारतीय संस्कृति को न सिर्फ आत्मसात कर रहे हैं, बल्कि भारत के युवाओं से शादी करने से नहीं हिचक रहे हैं। ग्वालियर के राहुल बोहरे की शादी जर्मनी की एमिली बोटना से हुई, जो अब सात फेरे लेकर एमिली बोहरे बन चुकी हैं।
ग्वालियर में हुई इस चर्चित शादी में भले ही भारत और जर्मनी दो संस्कृतियों का मिलन देखने को मिला। लेकिन विवाह की सभी रस्में भारतीय पंरपरा के अनुसार ही पूरी की गईं। जयमाला के साथ राहुल-एमिली ने अग्नि के समक्ष वेद-मंत्रोंच्चार की पवित्र ध्वनि के बीच सात फेरे लिए। राहुल और एमिली ने अग्नि के सात फेरे लिए तो हर फेरे पर वेद मंत्र उच्चारित किए गए। अनुवादकों ने हर वेदमंत्र यानि किस फेरे का क्या महत्व है, दूल्हा-दुल्हन को बताया।
एचआर हैं एमिली बोटना
बताया जा रहा है कि राहुल सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि एमिली एचआर। चंबल की संस्कृति में पले-बढ़े मूलत: भिंड के रहने वाले राहुल बोहरे के माता-पिता सीमा-हरिमोहन बोहरे थाटीपुर चौहान प्याऊ स्थित प्रमिला प्लाजा में निवास करते हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर राहुल बोहरे पिछले 8 साल से जर्मनी में जॉब कर रहे हैं। जिस कंपनी में वे जॉब करते हैं, उसी के एचआर डिपार्टमेंट में काम करने वाली एमिली की सादगी उनको पसंद आई और धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई।
प्यार और शादी दोनों के ही प्रपोजल राहुल की ओर से रखे गए। इन्हें स्वीकार करने में एमिली ने बिना हिचके तुरंत हां कर दी, क्योंकि पहले ही दिन से वो राहुल को अपना लाइफ पार्टनर मान चुकी थी।
माता-पिता की रजामंदी से बजी शहनाई
इस शादी की सबसे बड़ी खास बात यह है कि एक पंरपरावादी ब्राह्मण परिवार के होते हुए राहुल को यह भरोसा था कि उनके माता-पिता जरूर उसकी भावनाओं को समझेंगे। राहुल ने अपने पिता हरिमोहन बोहरे को अपनी भावना से अवगत कराया। हरिमोहन ने यह कहकर एक लाइन में हां कर दी कि बच्चों की खुशी में ही हमारी खुशी है। बोहरे परिवार के हां करते ही जर्मनी और ग्वालियर दोनों ही जगह शादी की तैयारियां प्रारंभ हो गईं, क्योंकि एमिली के परिजनों को तो पहले से ही कोई ऐतराज नहीं था।
जर्मन रिश्तेदारों ने भी पहने भारतीय परिधान
गतरात्रि पंचसितारा सुविधाओं से सुसज्जित रेशमतारा रिसोर्ट में एक भव्य समारोह में राहुल और एमिली की शादी की रस्मे निभाई गईं, जिसमें बोहरे परिवार के सगे-संबधी और चुनिंदा मित्रों के साथ जर्मनी से आए एमिली के तीन दर्जन रिश्तेदारों ने भी शिरकत की, जो पूरी तरह भारतीय रंग में रंगे नजर आ रहे थे। इस शादी में शामिल होने के लिए एमिली के महिला रिश्तेदारों ने जहां खासतौर पर लहंगा चोली जैसे भारतीय परिधान डिजायन करवाए थे, वहीं जर्मन पुरूष शेरवानी और पगड़ी में थे।
डीजे की जगह बजी शहनाई
डीजे के तेज शोर की बजाय शहनाई की सुमधुर ध्वनि समूचे वातवरण को आलोकित कर रही थी। वहीं भाषा के बंधनों से परे जर्मन से आए रिश्तेदार बोहरे परिवार एवं उनके सगे संबधियों से मेलजोल बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।
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