ग्वालियर.
हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में एकल पीठ ने डकैत पीड़ितों को सरकारी नौकरी मिलने पर बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने अब देश सिंह नामक युवक की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर, परिवार दस्यु प्रभावित है तो इसका यह मतलब नहीं है कि शासकीय नौकरी के लिए पात्रता मिल जाएगी। ऐसे व्यक्ति को सिर्फ प्राथमिकता दी जा सकती है।
युवक ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए बताया कि डाकुओं ने उसके पिता का अपहरण कर लिया था, जिसमें फिरौती की रकम चुकाने के बाद उन्हें छोड़ा गया।
शासन ने दावे को किया खारिज
याचिकाकर्ता ने कहा कि शासन के सन् 1972 में बनाए गए नियम के अनुसार उसका परिवार दस्यु प्रभावित है और उसे शासकीय नौकरी दी जाए। शासन की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रविंद्र दीक्षित ने कहा कि यह बात सही है कि पॉलिसी दस्यु प्रभावित परिवारों से जुड़ी है, लेकिन इसमें कहीं इस बात का उल्लेख नहीं है कि ऐसे परिवार से जुड़े व्यक्ति को शासकीय नौकरी दी जाएगी।
क्या कहता है नियम
नियम कहता है कि ऐसे व्यक्ति को पहले शासकीय विभाग में रिक्त पदों पर हो रही नियुक्ति की प्रक्रिया में नियमानुसार भाग लेना होगा। उसको आवेदन करना होगा, जिसके बाद भी उस प्रतिभागी को सिर्फ प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त अन्य कोई लाभ नहीं मिल सकेगा। कोर्ट ने तर्कों से सहमति जताई और युवक की याचिका को खारिज कर दिया।
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