इंदौर
सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल (एसएसएच) में संचालित बोनमैरो प्रत्यारोपण केंद्र को अब राष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज द्वारा संचालित इस केंद्र का जल्द ही इंडियन सोसायटी फार ब्लड एंड मैरो ट्रांसप्लांटेशन (आइएसबीएमटी) में पंजीयन किया जाएगा। इसके बाद यह प्रदेश का पहला ऐसा सरकारी केंद्र बन जाएगा, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त होगी। इससे इंदौर में अब अपनों के अलावा पराए भी मरीज को बोनमैरो दे सकेंगे। राष्ट्रीय स्तर का केंद्र बनने से बड़ी संस्थाओं से मरीजों को आर्थिक सहायता मिलने लगेगी। राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने वाली दात्री संस्था में भी रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।
अब बिना किसी खून के रिश्ते वाले भी डोनर बन सकते हैं
अधिकारियों ने बताया कि अभी तक इस केंद्र में केवल उन्हीं लोगों से बोनमैरो प्रत्यारोपण किया जा रहा था, जो मरीज के सगे-संबंधी होते हैं, लेकिन नेशनल सोसायटी में रजिस्ट्रेशन के बाद अब अनरिलेटेड डोनर यानी बिना किसी खून के रिश्ते वाले लोग भी डोनर बन सकेंगे। इससे उन मरीजों को लाभ मिलेगा, जिनके परिवार में कोई उपयुक्त डोनर मौजूद नहीं होता। प्रबंधन ने पंजीयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
130 से अधिक निश्शुल्क बोनमैरो प्रत्यारोपण
केंद्र में अब तक 130 से ज्यादा मरीजों का बोनमैरो प्रत्यारोपण निश्शुल्क किया जा चुका है। जबकि निजी अस्पतालों में इसी प्रक्रिया पर एक मरीज का खर्च करीब 20 लाख रुपये तक आता है। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को यहां इलाज में राहत मिल रही है। यह सुविधा पीएम केयर फंड, मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान निधि, आयुष्मान भारत योजना, सामाजिक संस्थाएं आदि के अंतर्गत मिलने वाले फंड से दी जा रही है।
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