मध्य प्रदेश सरकार अगले साल पांच नए मेडिकल कॉलेज खोलेगी, जाने कहाँ -कहाँ

भोपाल

मध्य प्रदेश के मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर है. प्रदेश में सरकार 5 नए मेडिकल कॉलेज खोलने जा रही है. ये कॉलेज राजगढ़, बुदनी, सिंगरौली, मंडला और श्योपुर में खोले जाएंगे. जानकारी के मुताबिक इन कॉलेजों में सीटों की संख्या 150 होगी. इस तरह प्रदेश में सरकारी कॉलेजों मेडिकल की 750 सीटों की बढ़ोतरी हो जाएगी. इन सीटों में 5 फीसदी सीटें उन छात्रों के लिए रिजर्व रहेंगीं, जिन्होंने सरकारी स्कूलों से पढ़ाई की है. इस मामले को लेकर उपमुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल का कहना है कि इन कॉलेजों के अगले सत्र तक तैयार होने की उम्मीद है.

दूसरी ओर, मंदसौर, सिवनी और नीमच जिलों के मेडिकल कॉलेजों को इसी सत्र से मंजूरी मिल गई है. इन कॉलेजों को 50-50 सीटों पर अनुमति मिली है. इन कॉलेजों में भी सरकार 100-100 सीटें बढ़ाने की योजना तैयार कर रही है. इस तरह कुलमिलाकर प्रदेश में मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए एक हजार से ज्यादा सीटें बढ़ जाएंगी. प्रदेश में अभी तक 4 सरकारी मेडिकल कॉलेज और 13 ऑटोनोमस कॉलेज हैं. इन सभी कॉलेजों को मिलाकर 22 मेडिकल ऐसे हो जाएंगे, जिनमें सरकारी कोटा उपलब्ध होगा.

इतना रखा जा रहा स्टाफ
जानकारी के मुताबिक, सरकार सिवनी, मंदसौर, नीमच, सिंगरौली और श्योपुर मेडिकल कॉलेजों के लिए 448 पदों पर भर्ती कर चुकी है. सभी कॉलेजों के लिए डीन भी नियुक्त हो चुके हैं. इन पाचों कॉलेजों में 69 प्रोफेसर, 146 एसोसिएट प्रोफेसर, 233 असिस्टेंट प्रोफेसर नियु्कत हो चुके हैं. गौरतलब है कि प्रदेश में लंबे समय से यह मांग हो रही थी कि सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले जाएं. सरकार ने इस मांग को गंभीरता से लिया और सरकारी कॉलेज खोलने का फैसला किया.

3 जुलाई हुई थी 3 मेडिकल कॉलेजों की घोषणा
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इस साल 3 जुलाई को विधानसभ में बजट पेश किया था. उन्होंने बताया था कि एक ओर प्रदेश में तीन नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे, तो दूसरी तरफ 22 नए आईटीआई स्थापित किए जाएंगे. सरकार ने शिक्षा के लिए 22600 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है.

अभी राज्य में 17 मेडिकल कॉलेज

फिलहाल, राज्य में 13 ऑटोनॉमस और 4 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। नए कॉलेजों के खुलने के बाद सरकारी कोटे वाले मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी। अगले सत्र तक इन कॉलेजों को तैयार होने की उम्मीद है। यह जानकारी अधिकारियों ने दी है। सरकार के इस कदम से राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी और डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी।

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