एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम में लगातार 2 तिमाही से मध्यप्रदेश प्रथम

एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम में लगातार 2 तिमाही से मध्यप्रदेश प्रथम

यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, समर्पण और टीमवर्क का प्रतिफल: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

वर्ष 2025-26 में 70 लाख से अधिक बच्चों और 9 लाख 42 हज़ार गर्भवती महिलाओं की जाँच

45 लाख महिलाओं एवं बच्चों को चिकित्सकीय उपचार

भोपाल 

मध्य प्रदेश में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों एवं महिलाओं में रक्त की कमी को दूर करने के लिए निरंतर और समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। एनीमिया मुक्त होने का अर्थ है कि बच्चों और महिलाओं के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य हो, जिससे उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर तरीके से हो सके। यह कार्यक्रम मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में स्थापित हुआ है। प्रदेश में किए गए सतत और प्रभावी प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत भारत सरकार की एचएमआईएस रैंकिंग में मध्य प्रदेश ने लगातार पिछली दो तिमाही में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, समर्पण और टीमवर्क का प्रतिफल है। उन्होंने अभियान से जुड़े समस्त चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं मैदानी अमले की सराहना करते हुए कहा कि इन सभी के अथक परिश्रम, संवेदनशीलता और सेवा भाव के कारण ही इतने व्यापक स्तर पर जांच, उपचार और जागरूकता संभव हो पाई है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों को बधाई देते हुए अपेक्षा व्यक्त की कि वे इसी समर्पण के साथ कार्य करते हुए प्रदेश को पूर्ण रूप से एनीमिया मुक्त बनाने के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर रहेंगे।

वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान प्रदेश में दस्तक अभियान के प्रथम चरण का संचालन 22 जुलाई से 16 सितम्बर 2025 तक किया गया। इस अवधि में 6 माह से 59 माह तक के कुल 70.62 लाख बच्चों में डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर के माध्यम से हीमोग्लोबिन की जांच सुनिश्चित की गई। जांच के पश्चात लगभग 35.21 लाख अल्प एवं मध्यम एनीमिक बच्चों को आवश्यक चिकित्सकीय उपचार प्रदान किया गया, जबकि 3,575 गंभीर एनीमिया से ग्रस्त बच्चों को चिन्हांकित कर जिला स्तर पर रक्ताधान अथवा यथोचित प्रबंधन सुनिश्चित किया गया।

अभियान के अंतर्गत प्रदेश की 9.42 लाख गर्भवती महिलाओं की एनीमिया जांच की गई। जांच के दौरान 3.02 लाख मध्यम से गंभीर तथा 10,660 अतिगंभीर एनीमिक महिलाओं को चिन्हांकित किया गया, जिन्हें आयरन एवं फोलिक एसिड (आई.एफ.ए.), आयरन सुक्रोश, एफ.सी.एम. तथा आवश्यकता अनुसार रक्ताधान के माध्यम से उपचारित किया गया। इन प्रयासों से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ सुरक्षित मातृत्व को भी बढ़ावा मिला है।

एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार के लिए प्रदेश में अपनाई गई बहुआयामी रणनीति

एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार के लिए प्रदेश में बहुआयामी रणनीति अपनाई गई है, जिसमें आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों एवं सिरप का नियमित वितरण, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, बच्चों में कृमि नियंत्रण (डिवॉर्मिंग) अभियान, पोषण युक्त आहार को बढ़ावा, किशोरियों के लिए साप्ताहिक आयरन सप्लीमेंटेशन, स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों में स्क्रीनिंग तथा पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियानों का संचालन शामिल है। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से सूचना एवं व्यापक प्रचार-प्रसार कर नागरिकों को जागरूक भी किया गया है।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा एनीमिया मुक्त भारत अभियान की शुरुआत वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान) के अंतर्गत की गई थी। इस अभियान का वर्तमान लक्ष्य मातृ एवं बाल स्वास्थ्य में सुधार लाना तथा बच्चों और महिलाओं को एनीमिया मुक्त बनाना है। मध्य प्रदेश में किए जा रहे समर्पित प्रयास इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं और एक स्वस्थ, सशक्त एवं सक्षम समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

 

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