जल जीवन मिशन में 1000 करोड़ के घोटाले पर सियासी घमासान, कांग्रेस नेता ने उठाया ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ नीति पर सवाल

भोपाल 

जल जीवन मिशन के तहत हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले ने सियासी हलचल मचा दी है। इसे लेकर कांग्रेस लगातार सवाल कर रही है। अब प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने प्रदेश सरकार को घेरते हुए पीएम मोदी से सवाल किया है कि ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ की नीति का क्या हुआ।

ये मामला तब सामने आया जब पूर्व विधायक किशोर समरीते ने प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत पत्र भेजकर आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के 30,000 करोड़ के बजट में से लगभग 1,000 करोड़ रुपए कमीशन के रूप में वसूले गए। इसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके, विभाग के इंजीनियर इन चीफ बीके सोनगरिया और उनके अकाउंटेंट महेंद्र खरे के नाम शामिल थे।

कांग्रेस ने किए सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के “ना खाऊँगा, ना खाने दूँगा” के नारे पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि “मोदी जी ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत का वादा किया था, लेकिन उनकी ही पार्टी की सरकार में इतना बड़ा घोटाला सामने आया है। क्या यह ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा सिर्फ दिखावा है? देश जानना चाहता है कि इस घोटाले पर उनकी चुप्पी क्यों है”।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया  X पर एक पोस्ट लिखकर प्रदेश की भाजपा सरकार को एक बार फिर घोटाले की सरकार कहकर निशाना साधा है, उन्होंने लिखा- जनता को न नल मिला, न जल, मिला तो सिर्फ घोटालों का दल। जल जीवन मिशन के 30,000 करोड़ रुपये में से 1,000 करोड़ रुपये के कमीशन की शिकायत अप्रैल में सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक गई, जिसमें मंत्री संपतिया उइके और अफसरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए।

उमंग सिंघार ने सरकार से किये सवाल 

उमंग सिंघार ने लिखा-  मामले को दो महीने तक दबाए रखने के बाद पीएचई विभाग ने जून के अंत में जांच के आदेश दिए और खानापूर्ति करते हुए विभाग ने मंत्री जी को क्लीनचिट भी दे डाली। इसलिए यहाँ सवाल उठते हैं कि PMO में शिकायत के फौरन बाद जांच शुरू क्यों नहीं की गई और इसे दो महीने तक क्यों लटकाया गया? जांच का जिम्मा किसी स्वतंत्र एजेंसी के बजाय विभाग से जुड़े अधिकारियों को क्यों सौंपा गया? कैसे आदेश जारी होने के मात्र एक सप्ताह में ही जांच पूरी भी कर ली गई और मामले में क्लीनचिट दे दी?

मामले की स्वतंत्र एजेंसी से पुनः जाँच की मांग 

उमंग सिंघार ने लिखा-  मैंने जल जीवन मिशन में पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर हो रही गड़बड़ियों के मुद्दे को कई बार विधानसभा में उठाया है लेकिन सरकार हर बार इस पर जवाब देने से बचती रही। मेरी मांग है कि इस मामले की जांच पुनः किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा हो ताकि सच्चाई प्रदेश की जनता के सामने आ सके।

हाथ में नल लेकर किया पुराना प्रदर्शन भी टैग किया  

उल्लेखनीय है कि उमंग सिंघार ने अपनी इस पोस्ट के साथ 19 दिसंबर 2024 को उनके द्वारा हाथ में नल को टोंटी लेकर  किये गए प्रदर्शन के वीडियो भी टैग किये हैं जिसमें उन्होंने लिखा था- भाजपा के जल जीवन मिशन के नल से सिर्फ हवा आ रही है, पानी तो भाजपा के भ्रष्टाचार की भेट चढ़ चुका है। आज भी प्रदेश की महिलाएं पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन भाजपा सरकार को सिर्फ कमीशन से मतलब है। यह है भाजपा की असलियत।

मंत्री को क्लीन चिट देने के बाद ईएनसी ने दी ये सफाई 

आदेश वायरल होने के बाद ईएनसी ने सफाई दी और कहा कि जाँच में शिकायत तथ्यहीन निकली है कोई दस्तावेज नहीं मिले हैं सिर्फ आरटीआई में मिली विभागीय चिट्ठियों को आधार बनाकर शिकायत की गई थी। उन्होंने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन और भुगतान स्थानीय स्तर पर होता है इसलिए ईएनसी और मंत्री पर सीधे तौर पर कोई जवाबदारी नहीं बनती है।

क्या है मामला

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य देश के हर ग्रामीण घर में नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। मध्यप्रदेश को इस योजना के तहत केंद्र सरकार से तीस हज़ार करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। पूर्व विधायक किशोर समरीते ने पीएमओ को एक शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया कि इस राशि में से 1000 करोड़ रुपये की कमीशनखोरी की गई, जिसमें मंत्री संपतिया उइके के साथ-साथ तत्कालीन प्रमुख अभियंता बीके सोनगरिया और उनके अकाउंटेंट महेंद्र खरे भी शामिल हैं। इन आरोपों के जवाब में मंत्री संपतिया उइके ने ख़ुद को निर्दोष बताया और कहा कि वो हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं।दरअसल पूर्व विधायक किशोर समरीते ने 12 अप्रैल को प्रधानमंत्री कार्यालय को एक शिकायती पत्र भेजा था जिसमें प्रदेश की पीएचई मंत्री संपतिया उइके पर जल जीवन मिशन में 1000 करोड़ रुपए की घूस लेने के आरोप लगाये, पीएमओ ने 24 अप्रैल को इस शिकायत को राज्य सरकार के पास भेज दिया, ये शिकायत 21 जून को पीएचई के ईएनसी संजय अंधवान के पास पहुंची और उन्होंने इसकी जाँच के आदेश दे दिए, आदेश सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

Admin

Share
Published by
Admin

Recent Posts

छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक बदलाव: गृह सचिव रमेश कुमार को सहकारिता एवं रजिस्ट्रार विभाग के आयुक्त की जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक बदलाव: गृह सचिव रमेश कुमार को सहकारिता एवं रजिस्ट्रार विभाग के आयुक्त की जिम्मेदारी

रायपुर. रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने आखिरकार सहकारिता विभाग की सबसे अहम कुर्सी पर नियुक्ति कर…

27 minutes ago
MP में सरकारी नौकरियों के लिए खत्म हुआ दो बच्चों का नियम, भाजपा सरकार का बड़ा फैसला

MP में सरकारी नौकरियों के लिए खत्म हुआ दो बच्चों का नियम, भाजपा सरकार का बड़ा फैसला

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को एक बड़े फैसले में सरकारी सेवा नियमों से…

32 minutes ago
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई और शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई और शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय…

32 minutes ago
BRICS Agriculture Conference: इंदौर की हेरिटेज वॉक पर निकले विदेशी मेहमान, जाना होलकरकालीन इतिहास

BRICS Agriculture Conference: इंदौर की हेरिटेज वॉक पर निकले विदेशी मेहमान, जाना होलकरकालीन इतिहास

इंदौर  इंदौर में चल रहे ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में भाग लेने आए अलग-अलग देशों से…

46 minutes ago
नई शाला में ज्वाइनिंग नहीं देने पर शिक्षक पदच्युत, स्कूल मर्जर आदेश की अवहेलना पड़ी भारी

नई शाला में ज्वाइनिंग नहीं देने पर शिक्षक पदच्युत, स्कूल मर्जर आदेश की अवहेलना पड़ी भारी

भिलाई. युक्तियुक्तकरण से प्रभावित 4 सहायक शिक्षक एलबी को नए पदांकित शालाओं में ज्वाइनिंग नहीं…

1 hour ago
CG : हिरलाभाटा में उचित मूल्य दुकान संचालन हेतु 24 जून तक आवेदन आमंत्रित

CG : हिरलाभाटा में उचित मूल्य दुकान संचालन हेतु 24 जून तक आवेदन आमंत्रित

जगदलपुर, कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बस्तर द्वारा छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश 2016 में…

2 hours ago