राजनांदगांव , विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आत्म जागृति का संदेश देते हुए कहा कि जहां आशा करेंगे वहां निराशा भी होगी। इस जीव ने आज तक आशा ही की, इसी वजह से यह जीव दुखी हो गया। आशा की वजह से ही वह इधर-उधर भटक रहा है।
जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती। एक पूरी होती तो दूसरी जागृत हो जाती है। हम इच्छाओं की पूर्ति के लिए सारा समय दे देते हैं किन्तु अपनी आत्मा की जागृति के लिए नहीं। कभी-कभी तो हम शुरुआत को ही सफलता मान बैठते हैं और फिर हमारी साधना वही लटक जाती है, जबकि लक्ष्य काफी दूर होता है। उन्होंने कहा कि जब तक पूर्णता नहीं रहेगी तब तक आत्म कल्याण के क्षेत्र में हम आगे बढ़ ही नहीं पाएंगे।
मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि सारी इच्छाएं सुख प्राप्ति के लिए होती है किंतु पता गलत होने की वजह से हम भटक जाते हैं। हमने आत्मा को छोड़कर जगत से प्रेम किया किंतु आत्मा की ओर देखा भी नहीं। उन्होंने कहा कि एक मां के दो संतान है जिनमें से एक बच्चा किसी परिवार में और दूसरा बच्चा किसी अन्य परिवार में रह रहा है तो निश्चित है कि दोनों के आचार- व्यवहार में अंतर दिखेगा ही। उन्होंने कहा कि इच्छाएं जब तक संपूर्ण रूप से समाप्त नहीं हो जाएगी, तब तक हम आत्म कल्याण के मार्ग की ओर बढ़ नहीं पाएंगे। योग्य समय का इंतजार कीजिए और समय आने पर आत्म कल्याण की मार्ग में बढ़ जाए। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाज़रा ने दीं।
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