भोपाल
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) के कई कोर्स आधा दर्जन विद्यार्थियों के भरोसे चल रहे हैं। इसके वेतन, छात्रों की परीक्षा, इंस्ट्रूमेंट, विभाग के रखरखाब आदि पर हर साल करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। यहां कोर्स में छात्र से ज्यादा फैकल्टी की संख्या मौजूद है। जहां संसाधनों की भी कोई कमी नहीं है।
50 प्रतिशत की शर्त
आरजीपीवी ने हिन्दी में इंजीनियरिंग के लिए 50 प्रतिशत छात्र की शर्त लागू की है। छात्र हिंदी में पढ़ने की इच्छा जताते हैं, तो 50 प्रतिशत संख्या होने पर ही उन्हें हिंदी में पढ़ने की मंजूरी दी जाएगी। पिछले दिनों कुलपति प्रो. सुनील कुमार की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद में यह निर्णय लिया गया था।
यहां हैं कम विद्यार्थी
आरजीपीवी के नैनो टेक्नोलॉजी में मात्र 10 छात्र हैं, इनको पढ़ाने के लिए करीब 5 टीचर हैं। इसी तरह एनर्जी डिपार्टर्मेंट में मात्र 5 छात्र हैं, 6 फैकल्टी हैं। फार्मेसी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही हैं। तकनीकी शिक्षा विभाग उक्त कोर्स में प्रवेश कराने के लिए काउंसलिंग संचालित करा रहा है। वर्तमान सत्र में प्रवेश कराने के लिए विभाग की तरफ से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। वहीं आरजीपीवी भी नये-नये इनोवेशन कर प्रवेश संख्या बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।
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