महिलाओं और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए बनेगा विशेष ऑनलाइन मॉड्यूल – मंत्री सुश्री भूरिया

महिलाओं और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए बनेगा विशेष ऑनलाइन मॉड्यूल – मंत्री सुश्री भूरिया

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और माताओं को साइबर फ्रॉड व डीपफेक से बचाने के लिए दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग
सिंहस्थ 2028 में गुमशुदा बच्चों को परिवार से मिलाने के लिए AI और तकनीक का होगा इस्तेमाल

मंत्री सुश्री भूरिया से गूगल और अहान फाउंडेशन के दल ने की सौजन्य भेंट

भोपाल 

मध्यप्रदेश में महिलाओं और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा, साइबर अपराधों से संरक्षण तथा उनके कल्याण के लिए संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से एक बड़ी पहल की है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया के भोपाल स्थित शासकीय निवास पर गूगल (Google) और 'अहान फाउंडेशन-रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म' के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। तकनीक के सकारात्मक उपयोग और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में गूगल की सर्च और जेनरेटिव एआई ट्रस्ट एंड सेफ्टी की डायरेक्टर श्रीमती स्निग्धा भारद्वाज, गूगल के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर (ट्रस्ट एंड सेफ्टी ग्लोबल एंगेजमेंट-APAC) श्री समीर जाधव, अहान फाउंडेशन की फाउंडर व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्रीमती सोनाली पाटणकर और मुख्य संचालन अधिकारी (सीओओ) श्री उन्मेष जोशी उपस्थित रहे।

डिजिटल सुरक्षा हमारा नैतिक दायित्व

महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि महिला एवं बाल विकास विभाग प्रदेश की आधी से ज्यादा आबादी (महिलाओं और बच्चों) का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में उन्हें इंटरनेट सेफ्टी के प्रति जागरूक करना हमारा नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुरक्षा और एआई (AI) आधारित महिला एवं बाल संरक्षण वर्तमान समय के बेहद संवेदनशील मुद्दे हैं। आज के युग में मोबाइल और सोशल मीडिया हमारे जीवन को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। हमें एक सकारात्मक और सुरक्षात्मक दृष्टिकोण अपनाकर तकनीक के इस बढ़ते दखल को सही दिशा देनी होगी।  मंत्री सुश्री भूरिया ने आगामी बैठक में एक विस्तृत संयुक्त कार्ययोजना प्रस्तुत करने का सुझाव भी दिया, ताकि विभाग और गूगल के बीच समन्वय स्थापित कर इंटरनेट को महिलाओं और बच्चों के लिए आसान, सुलभ और उपयोगी बनाया जा सके।

कुपोषण निवारण, साइबर सेफ्टी और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता

इस बैठक में विभाग और गूगल के बीच एक बेहतरीन कार्ययोजना पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। इसके तहत तकनीक के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के लिए चलाई जा रही शासकीय जनकल्याणकारी योजनाओं को सीधे और पारदर्शी तरीके से पात्र हितग्राही तक पहुँचाया जाएगा। इसके साथ ही, प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए विशेष ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे। इन मॉड्यूल्स में कुपोषण निवारण के आधुनिक तौर-तरीकों के साथ साइबर सिक्योरिटी के बुनियादी नियम भी होंगे, ताकि वे ग्रामीण स्तर पर माताओं और बहनों को ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए जागरूक कर सकें।

सिंहस्थ 2028 के लिए विशेष AI कार्ययोजना

बैठक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाला सिंहस्थ महापर्व रहा। सिंहस्थ जैसे विशाल जनसमुदाय वाले आयोजन में खोए हुए बच्चों को त्वरित रूप से खोजने और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकी समाधानों के उपयोग पर विस्तार से रणनीति बनाई गई। गूगल के सहयोग से एक ऐसी उन्नत ट्रैकिंग और मैपिंग कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे बच्चों को सुरक्षित और जल्द से जल्द उनके परिजनों तक पहुँचाया जा सके।

महाराष्ट्र के सफल मॉडल की तर्ज पर मध्यप्रदेश में काम

गूगल की डायरेक्टर (सर्च और जेनरिटिव AI ट्रस्ट एंड सेफ्टी) श्रीमती स्निग्धा भारद्वाज ने बताया कि गूगल ने पूर्व में महाराष्ट्र में शिक्षकों के लिए बड़े स्तर पर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एआई के बढ़ते उपयोग के कारण होने वाले अपराधों, जैसे डीपफेक और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से मानसिक प्रताड़ना को रोकने के लिए गूगल निरंतर तकनीकी समाधान और ट्रेनिंग प्रोवाइड करा रहा है। अहान फाउंडेशन की सीईओ श्रीमती सोनाली पाटणकर और सीओओ श्री उन्मेष जोशी ने भी अपने जमीनी अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वे महाराष्ट्र के कई जिलों में महिलाओं और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर काम कर रहे हैं। इस जागरूकता अभियान के कारण कई महिलाएं अपने साथ होने वाले साइबर अपराधों को समय रहते रोकने और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचाने में सफल रही हैं। मध्यप्रदेश में भी इसी तर्ज पर बड़े पैमाने पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। भविष्य में महिला एवं बाल विकास विभाग, गूगल और अहान फाउंडेशन की यह त्रिपक्षीय डिजिटल साझेदारी मध्यप्रदेश की महिलाओं और बच्चों के लिए एक सुरक्षित, सशक्त और डिजिटल रूप से साक्षर भविष्य का निर्माण करेगी।

 

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