डायल 112 में लगाया एंबुलेंस का साफ्टवेयर, 40 किमी दूर बता रहा नजदीकी पुलिस लोकेशन

भोपाल.

आमजन को तत्काल पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में दौड़ रहे डायल 112 वाहनों के संचालन के लिए उपयोग होने साफ्टवेयर में फर्जीवाड़ा सामने आया है। संचालन करने वाली कंपनी जीवीके ने कंप्यूटर एडेड डिस्पैच (सीएडी) सिस्टम निविदा शर्तों के अनुसार न लगाकर, ऐसा सिस्टम लगाया है, जिसे 108 एंबुलेंस के लिए तैयार किया गया था। कंपनी ने उसे 112 के हिसाब से बदला है, जिससे समस्याएं आ रही हैं।

सीएडी में कोडिंग और डाटा फीडिंग ठीक से नहीं होने के कारण सिस्टम यही पता नहीं कर पा रहा है कि घटनास्थल के पास कौन सा वाहन है और कौन दूरी पर है। पास के वाहन की जगह 40 से 80 किलोमीटर दूर तक के वाहन को घटनास्थल पर पहुंचने के लिए मैसेज पहुंच रहा है, जिसमें गाड़ी के पहुंचने में कई बार आधे घंटे से भी अधिक लग रहे हैं। एक ही वाहन को दो से तीन इवेंट एक साथ मिल रहे हैं। इसका नुकसान जनता को उठाना पड़ रहा है। बता दें कि इसी कंपनी को पहले 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन की जिम्मेदारी मिली थी।

कंपनी अभी 1200 गाड़ियों का संचालन कर रही है। अब पुलिस मुख्यालय की दूरसंचार शाखा जीवीके कंपनी द्वारा लगाए गए सिस्टम की जगह खुद अपनी जरूरत के अनुसार सीएडी लगाने जा रहा है। इसमें 10 से 11 करोड़ रुपये तक खर्च आएगा। जीवीके कंपनी को किए जाने वाले भुगतान में से ही यह राशि काटी जाएगी। जीवीके कंपनी ने इसी वर्ष अगस्त से काम संभाला था। पांच वर्ष के लिए काम दिया गया है, जिसमें लगभग 972 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

केस 1 – भोपाल के एमपी नगर जोन एक में पार्किंग विवाद होने पर छह जनवरी को शाम 4: 33 बजे डायल 112 को काल किया गया। 4:48 बजे बजे वाहन में तैनात पुलिसकर्मी की काल आई, लेकिन रास्ते से ही यह कहकर लौट गई कि घटनास्थल हमारे थाना क्षेत्र में नहीं आता, हम काल दूसरे थाने को ट्रांसफर कर रहे हैं। इसके बाद दूसरी गाड़ी आई तब तक लगभग आधे घंटे गुजर गए।

केस 2- जबलपुर के गढ़ा से नौ जनवरी को दोपहर दो बजे पूजा पयासी ने फोन कर डायल 112 की मदद मांगी। तीन मिनट में वाहन चालक से संपर्क हुआ। पूजा गढ़ा में थीं, लेकिन एफआरवी मदन महल की भेजी गई। इसमें समय लगा तो कंट्रोल रूम से संदेश देकर गढ़ा थाने के करीब की गाड़ी को टास्क देने की बात लिखकर भेजी गई। जबलपुर में पुलिस सहायता के लिए रोजाना औसतन 300 सूचनाएं आती हैं। इनमें दस प्रतिशत ऐसी होती हैं जिनमें घटना स्थल के पास की जगह दूर की गाड़ी भेजी जाती है।

केस 3- रिस्पांस टाइम 12 मिनट बताया, पर 22 मिनट बाद भी नहीं पहुंचा 112 वाहन 19 अक्टूबर को ग्वालियर के सिटी सेंटर स्थित कैलाश विहार में रात करीब साढ़े 12 बजे बदमाश दो युवकों को बुरी तरह पीट रहे थे। घटना के प्रत्यक्षदर्शी ने मोबाइल एप 112 से सूचना दी। रिवर्ट मैसेज में रिस्पांस टाइम 12 मिनट बताया। करीब 22 मिनट बाद सूचनाकर्ता को काल आई कि लोकेशन क्या है। लोकेशन बताने के लगभग पांच मिनट बाद पुलिस पहुंची 112 से पहुंची। तब तक पीटने वाले भाग चुके थे।

अच्छे से काम नहीं कर रहा

अभी जो साफ्टवेयर उपयोग हो रहा है वह उतना अच्छे से काम नहीं कर रहा है। कुछ कमियां थीं। इसलिए सीएडी में परिवर्तन कर रहे हैं, जिससे जनता को बेहतर इमरजेंसी सेवा मिल सके।
नीतू ठाकुर, एसपी, डायल 112

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