सारनी
सतपुड़ा ताप विद्युत गृह के (सीएचपी) कोल हैंडलिंग प्लांट में तवा वन, तवा टू, छतरपुर वन, छतरपुर टू, उर्धन, नेहरिया और विष्णुपुरी खदानों से कोयला पहुंचाने का कार्य विभिन्न ट्रांसपोर्टरों के माध्यम से किया जाता है। प्रतिस्पर्धा के चलते ट्रांसपोर्टरों के माध्यम से कम दर पर कोयला ट्रांसपोर्ट करने का कार्य लिया गया था।
सबसे बड़ा आश्चर्य की बात तो यह है कि नुकसान में कार्य लेने के बावजूद भी ट्रक का मेंटेनेंस ड्राइवर की पेमेंट मैनेजरों और बाकी खर्चों को आसानी से मेंटेन किया जा रहा था। यह तो वही बात हो गई कि ट्रांसपोर्टरों का एक तरफ दिवाला निकल रहा था। तो दूसरी तरफ मुनाफा भी हो रहा था। सीएचपी के तीनों तोलकांटो से चिप बरामद होना। कम दर पर कोयला ट्रांसपोर्ट करना। 15 हजार की पेमेंट लेने वाले मैनेजरों के पास करोड़ों की संपत्ति होना कहीं ना कहीं जांच की ओर इशारा करता है।
गौरतलब रहे कि सीएचपी कोयला लेकर आने वाले वाहनों से कोयला उतारना कोई नई बात नहीं है। कई बार ऐसे घटनाक्रम सामने आ चुके हैं। जिन पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय अधिकारियों के माध्यम से महज औपचारिकता कर ट्रांसपोर्टरों को और वाहनों को छोड़ दिया गया। पूर्व में भी एक बड़े ट्रांसपोर्टर को कोयले की गाड़ी में हेरफेर करने के चलते ब्लैक लिस्ट करते-करते छोड़ दिया गया। इसके बावजूद भी कोयला वाहनों में हेराफेरी बंद नहीं हुई।
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