30 महीने में 5.70 लाख घटी लाड़ली बहनों की संख्या,आज 1.25 करोड़ महिलाओं के खाते में ट्रांसफर होंगे 1836 करोड़

भोपाल 

मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में ढाई साल के अंतराल में 5 लाख 70 हजार से अधिक महिलाओं के नाम बाहर हो गए हैं। अब इस योजना में पात्र महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार ही रह गई है।

एक साल के अंतराल में इस योजना में एक लाख से अधिक नाम कम हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव योजना के लिए पात्र बचीं महिलाओं के खातों में आज 1500 रुपए के मान से 1836 करोड़ से अधिक की रकम ट्रांसफर करेंगे। लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त आज नर्मदापुरम के माखननगर में होने वाले आयोजन के दौरान ट्रांसफर की जाएगी।

इस योजना में पहले 1250 रुपए दिए जाते थे, लेकिन नवंबर 2025 से 250 रुपए बढ़ाकर 1500 रुपए दिए जा रहे हैं। इसके बाद राज्य सरकार पर हर माह 300 करोड़ रुपए से अधिक का वित्तीय भार बढ़ा है। अक्टूबर 2025 तक 1500 करोड़ रुपए से अधिक की राशि योजना में एक साथ ट्रांसफर होती थी, जो दिसंबर 2025 में 1850 करोड़ रुपए से अधिक तक पहुंच गई थी।

इस तरह काटे गए लाड़ली बहना योजना में नाम लाड़ली बहना योजना में नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं, इसके उलट योजना में पात्र महिलाओं के नाम उम्र और अन्य शर्तों के आधार पर कटते जा रहे हैं। इसी कारण इनकी संख्या 2023, 2024 और 2025 में बढ़ने की बजाय घटी है।

जब योजना शुरू हुई थी तो कुल 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 आवेदन आए थे। इसके बाद 2 लाख 18 हजार 858 नाम आपत्तियों को आधार बनाकर काटे गए थे, जिसके बाद यह संख्या 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। अब यह संख्या एक करोड़ 25 लाख से अधिक तक पहुंचने वाली है।

योजना अंतर्गत अब तक जून 2023 से दिसंबर 2025 की अवधि में कुल 48 हजार 632 करोड़ 70 लाख रुपए हितग्राही महिलाओं के खातों में भेजी जा चुकी है। मोहन यादव के सीएम बनने के बाद जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के दौरान 38 हजार 635 करोड़ 89 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए हैं।

ऐसे दिमाग में आई लाड़ली बहना तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 4 मार्च 2023 को भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान लाड़ली बहना योजना बनाने का खुलासा किया था। उन्होंने सभा में सार्वजनिक रूप से कहा कि मैं रात भर जागा। सुबह 4 बजे मैंने पत्नी को जगाया। कहा- एक योजना मेरे दिमाग में आई है। सभी बहनें मुझे भाई मानती हैं। मैं भी तो अपनी बहनों को कुछ दूं।

साल में एक बार पैसा देने से काम नहीं चलेगा। हर महीने पैसा देंगे, तो बहनों की समस्या का समाधान होगा। वे इज्जत से जी सकेंगी। इसी विचार से बनी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना। यह योजना नहीं, बहनों की जिंदगी बचाने का महा अभियान है।

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