पीएचई विभाग में इंजीनियरों द्वारा टेंडर की शर्तें बदलने का चल रहा खेल

भोपाल

नल-जल योजनाओं समेत कई काम करने वाले पीएचई विभाग के टेंडर पूर्व योग्यता निर्धारण, टेंडर प्रोसेस, टेस्टिंग और वैल्युएशन व निराकरण की कार्यवाही में फील्ड के इंजीनियरों द्वारा मनमानी शर्तें थोपने की शिकायतें पिछले दिनों राज्य शासन के पास पहुंची हैं।

पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्रियों और अन्य इंजीनियरों द्वारा विभाग के माध्यम से कराए जाने वाले दो करोड़ रुपए से अधिक कामों में टेंडर की शर्तें बदलने का खेल चल रहा है। इस पर राज्य शासन ने कड़ी आपत्ति की है जिसके बाद विभाग के प्रमुख अभियंता ने सभी मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण यंत्रियों और कार्यपालन यंत्रियों से इस मामले में नाराजगी जताते हुए शासन द्वारा तय टेंडर शर्तों के आधार पर ही काम कराने के लिए आदेश जारी किया है।

विभाग द्वारा नल जल योजनाओं समेत जो भी काम कराए जाते हैं, उसमें टेंडर पूर्व योग्यता निर्धारण, टेंडर प्रोसेस, टेस्टिंग और वैल्युएशन व निराकरण की कार्यवाही में फील्ड के इंजीनियरों द्वारा मनमानी शर्तें थोपने की शिकायतें पिछले दिनों राज्य शासन के पास पहुंची है।

शासन तक पहुंची कम्प्लेन के बाद विभाग ने पाया है कि दो करोड़ तक और उससे अधिक लागत वाले कामों को लेकर विभाग की जो टेंडर शर्तें तय हैं, उसका उल्लंघन जिलों में किया जा रहा है। इसके बाद अब इन अधिकारियों को विभाग की ओर से वर्ष 2017 और 2018 में तय टेंडर शर्तों के आधार पर काम कराने के लिए कहा गया है। विभाग ने अगस्त 2018 के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि विभागीय तकनीकी समिति की अनुशंसा पर विशिष्ट प्रकार के कामों के लिए टेंडर पूर्व शर्तें तय करने के लिए प्रमुख अभियंता पीएचई अधिकृत हैं। इसके बाद स्थिति यह है कि अब तक कोई भी नई शर्तें जारी नहीं की गई है।

प्रमुख अभियंता पीएचई के अनुसार कई जिलों में अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा नल जल योजनाओं के टेंडर में शासन द्वारा जारी आदेश पर अमल न करते हुए अपने स्तर से टेंडर में विशेष शर्तें तय कर टेंडर बुलाए जा रहे हैं। शासन को यह भी पता चला है कि टेंडर प्रक्रिया में निविदा का मूल्यांकन और परीक्षण के दौरान इंजीनियर अपने हिसाब से फिजिकल और फाइनेंशियल अर्हता शर्तों की व्याख्या कर रहे हैं। इसके कारण काम करने वाले पीछे हट रहे हैं और शासन को शिकायत कर रहे हैं। इसका असर नल-जल योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है।

नल-जल योजनाओं के साथ जल जीवन मिशन के काम जारी
प्रदेश में घर-घर नल-जल पहुंचाने के लिए पीएचई विभाग के माध्यम से नल-जल योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से कराया जा रहा है। केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन भी इसी तरह के काम कराने वाली योजना है, जिसमें घर-घर जल पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपए शासन ने जारी किए हैं। इस तरह की शिकायतों के बाद अब पिछले पांच सालों में हुए टेंडर और उसमें इंजीनियरों द्वारा बदली गई शर्तों की जांच की मांग की जा रही है ताकि बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हो सके।

ठेकेदारों का अनुभवी होना जरूरी
विभाग ने साफ किया है कि यदि टेंडर में इंटेक वेल, एनीकट, ट्रीटमेंट प्लांट और ओवर हेड टैंक का काम शामिल हो तभी टेंडर के फिजिकल वेरिफिकेशन की जरूरत है तथा ऐसे मामले में ठेकेदार को 33 प्रतिशत मात्रा, क्षमता का कार्य अनुभव जरूरी होगा। इस मामले में प्री क्वालिफिकेशन के नाम पर मूल्यांकन किए जाने के विरोध ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा है। प्रमुख अभियंता से कहा है कि दो करोड़ तक और उससे अधिक लागत के लिए जो शर्तें तय की गई हैं, उसका कड़ाई से पालन कराएं अन्यथा जांच के बाद कार्यवाही की जाएगी।

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