भोपाल
मध्य प्रदेश में इस बार स्वेच्छा से स्थानांतरण मांगने वालों को प्राथमिकता मिल सकती है। कर्मचारी विभिन्न कारणों से स्वैच्छिक आधार पर स्थानांतरण चाहते हैं जबकि विभागों की प्राथमिकता प्रशासनिक आधार रहता है। स्थानांतरण नहीं होने से कार्य प्रभावित होता है। इसे देखते हुए ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछली कैबिनेट की बैठक में स्वयं यह बात उठाई और कहा कि स्वैच्छिक स्थानांतरण तो अधिक होने चाहिए।
अब सामान्य प्रशासन विभाग आगामी मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में जो स्थानांतरण नीति प्रस्तावित करने जा रहा है, उसमें स्वेच्छा से स्थानांतरण चाहने वालों को प्राथमिकता दी जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि प्रति वर्ष बड़ी संख्या में अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा व्यक्तिगत कारण बताकर स्वैच्छिक स्थानांतरण की मांग की जाती है। किसी भी संवर्ग में 20 प्रतिशत से अधिक स्थानांतरण करने की अनुमति नहीं होती है। इसके कारण अधिकांश आवेदनों का निराकरण नहीं हो पाता है।
स्वैच्छिक तबादलों के लाभ और प्रस्तावित नीति
स्वैच्छिक स्थानांतरण में प्रशासनिक व्यय भी नहीं देना होता है। इसका दूसरा लाभ यह है कि ऐच्छिक स्थान पर पहुंचने से कर्मचारी की उत्पादकता बढ़ती है, क्योंकि वह मन लगाकर काम कर सकता है। इस व्यावहारिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वैच्छिक स्थानांतरण को प्राथमिकता देने की बात कही।
इसके आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग स्थानांतरण नीति-2026 में यह प्रस्तावित कर रहा है कि स्वैच्छिक आवेदनों को गुण-दोष के आधार पर पहले निराकरण किया जाएगा। यदि संभव होगा तो पहले इनके ही तबादले किए जाएंगे, फिर प्रशासनिक आधार को देखा जाएगा। स्थानांतरण से प्रतिबंध 15 मई से 15 जून तक के लिए हटाया जा सकता है।
निर्धारित किए जा सकते हैं ये प्रविधान
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